केंद्र ने जयपुर पोलो ग्राउंड को सरकारी जमीन घोषित करने का नोटिस लगाया
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को दिल्ली रेस क्लब के पास स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड में एक सार्वजनिक नोटिस लगाया, जिसमें 15 एकड़ से अधिक के इस भूखंड को सरकारी भूमि घोषित किया गया।
न्यायिक फैसले के एक दिन बाद जारी किए गए इस नोटिस में अनधिकृत कब्जे के खिलाफ चेतावनी भी दी गई है। पोलो ग्राउंड का कब्जा वापस लेने की यह कार्रवाई केंद्र सरकार और इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) में जारी विवाद के बीच हुई है। आईपीए ही इस ग्राउंड का प्रबंधन करता है और यह जमीन राजधानी के बीचों-बीच स्थित है।
शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट के वेकेशन जज धीरेंद्र राणा ने कहा कि अदालत सरकार द्वारा 20 मई को जयपुर पोलो ग्राउंड को खाली करने के आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है।
अदालत ने कहा, "जहां तक सुनवाई की अगली तारीख तक विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाने की बात है, तो मैं इस अनुरोध को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हूं। इसी तरह का अनुरोध प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पीएचसी और दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष भी किया गया था और अपीलकर्ता को कोई राहत नहीं दी गई थी। इसलिए, न्यायिक अनुशासन और औचित्य को ध्यान में रखते हुए, मैं अगली तारीख तक भी विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हूं।"
दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष हुई कार्यवाही का जिक्र करते हुए, अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 8 जून को आईपीए की रिट याचिका का निपटारा कर दिया था और बेदखली के खिलाफ कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी थी। केंद्र सरकार इस इलाके में महत्वपूर्ण सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा लेना चाहती है।
प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के पास हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में लीज पर दी गई जमीन का कब्जा वापस लेने के ही एक मामले में, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने पिछले महीने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के जरिए दिल्ली जिमखाना क्लब को नोटिस जारी किया था।
नोटिस में कहा गया था कि 2, सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ की संपत्ति रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए अत्यंत आवश्यक थी। इसमें परपेचुअल लीज डीड (हमेशा के लिए लीज एग्रीमेंट) के क्लॉज 4 का जिक्र किया गया है, जिसके तहत लीज देने वाले के पास यह अधिकार है कि अगर किसी सार्वजनिक मकसद के लिए जरूरत हो, तो वह प्रॉपर्टी का कब्जा वापस ले सकता है।
औपनिवेशिक दौर में 1913 में बना दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और सबसे खास सोशल संस्थानों में से एक माना जाता है। यह लंबे समय से सीनियर नौकरशाहों, राजनयिकों, सेना के अधिकारियों और प्रभावशाली नागरिकों के मिलने-जुलने की जगह रहा है। बाद में, दिल्ली हाई कोर्ट ने लुटियंस दिल्ली में मौजूद प्रॉपर्टी का कब्जा वापस लेने के केंद्र सरकार के कदम के खिलाफ क्लब को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
--आईएएनएस
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