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'आईवीएफ में गड़बड़ी की वजह से हमारा पूरा परिवार सदमे में है', गुरुग्राम के दंपति ने सुनाई आपबीती

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। गुरुग्राम के दंपति ने आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) इलाज के दौरान 'एम्ब्रियो की अदला-बदली' की वजह से हुई गड़बड़ी और उससे जुड़ी अपनी दर्दनाक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे क्लिनिक और डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को निराशा और डिप्रेशन में धकेल दिया है।
'आईवीएफ में गड़बड़ी की वजह से हमारा पूरा परिवार सदमे में है', गुरुग्राम के दंपति ने सुनाई आपबीती

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। गुरुग्राम के दंपति ने आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) इलाज के दौरान 'एम्ब्रियो की अदला-बदली' की वजह से हुई गड़बड़ी और उससे जुड़ी अपनी दर्दनाक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे क्लिनिक और डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को निराशा और डिप्रेशन में धकेल दिया है।

राहुल राठौर ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए कहा कि वे अधिकारियों और मेडिकल बोर्ड के उदासीन और असंवेदनशील रवैये से भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। मेडिकल बोर्ड इस मामले की जांच कर सकता था और उनकी परेशानी का कोई 'समाधान' निकाल सकता था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

गुरुग्राम के रहने वाले राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर पिछले तीन महीनों से अपने 'असली बच्चों' के बारे में जानकारी पाने और इस पूरी गड़बड़ी की गहन जांच की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

राहुल राठौर ने आईएएनएस को बताया, "हमारे बुजुर्ग माता-पिता बहुत तकलीफ में हैं। मेरे पिता इतने सदमे में हैं कि वे बिल्कुल चुप हो गए हैं, और मेरी 80 वर्षीय मां मानसिक सदमे में हैं। मेरी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे से उबरने के लिए बहुत संघर्ष कर रहे हैं।"

यह दंपति पिछले तीन महीनों से संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क कर रहा है, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट के आदेश के बाद ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

दंपति ने कहा कि वे भावनात्मक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं, और अगर उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि उनकी परेशानी पिछले साल शुरू हुई, जब वे इलाज के लिए एक नामी आईवीएफ अस्पताल गए थे। उन्होंने सीमेन कलेक्शन, एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो डेवलपमेंट की पूरी प्रक्रिया का पालन किया।

14 मई, 2025 को महिला के गर्भ में एम्ब्रियो इम्प्लांट किए गए और इस साल जनवरी में उसने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। हालांकि, असली परेशानी तब शुरू हुई जब उन्हें बच्चों के शारीरिक लक्षणों में काफी अंतर दिखाई दिया।

दंपति ने बच्चों की डीएनए प्रोफाइलिंग करवाई और कथित तौर पर नतीजे मेल नहीं खाए, जिससे यह साबित हुआ कि जुड़वां बच्चे उनके जैविक बच्चे नहीं थे। राहुल राठौर ने कहा, "मैटरनिटी और पैटरनिटी, दोनों टेस्ट नेगेटिव आए। इस वजह से उनकी पत्नी की याददाश्त जाने लगी है।"

उन्होंने कहा, "हमें अभी तक यह नहीं पता चला है कि एम्ब्रियो (भ्रूण) किस स्टेज पर बदले गए थे।"

यह कपल मामले की जांच की मांग कर रहा है। वे एम्ब्रियो और लैब रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ आईवीएफ क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करवाना चाहते हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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