Delhi High Court: स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर सवाल, पुलिस से FIR की स्थिति स्पष्ट करने को कहा; न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ी
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान भारद्वाज के वकील ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट जंतर-मंतर मामले से जुड़ी सभी FIR रद्द कर चुका था, तो पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जाकर उन्हें गिरफ्तार कैसे किया।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि जिस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया है, उसकी FIR रद्द नहीं हुई है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा कि संबंधित FIR अभी अस्तित्व में है या नहीं।
हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस मामले में तुरंत अपना बयान दे या फिर हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करे। कोर्ट का मुख्य सवाल यही था कि जिस FIR के आधार पर गिरफ्तारी की गई है, वह कानूनी रूप से अभी प्रभावी है या नहीं।
FIR की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ होगी।
भारद्वाज की हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ी
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज की न्यायिक हिरासत को 14 दिन बढ़ाकर 21 सितंबर तक कर दिया है। भारद्वाज को सोमवार को तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल जज सौरभ प्रताप सिंह लालेड़ के सामने पेश किया गया था।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आगे की प्रक्रिया जारी रखी है।
बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली लाया गया।
5 सितंबर को कोर्ट ने पुलिस को एक दिन की कस्टोडियल पूछताछ की अनुमति दी थी। पूछताछ पूरी होने के बाद रविवार को उन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
संजय आजाद पर हमले के मामले से जुड़ा है केस
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी संजय आजाद पर हमले के मामले से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस इसी मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
भारद्वाज के वकील का कहना है कि गिरफ्तारी की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है, जबकि पुलिस का दावा है कि संबंधित FIR अभी भी वैध है और उसी के आधार पर कार्रवाई की गई है।
अब FIR की स्थिति पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब दिल्ली पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि गिरफ्तारी जिस FIR के आधार पर हुई, वह रद्द हुई है या अभी प्रभावी है। इस जवाब के बाद ही मामले की आगे की दिशा तय होगी।

