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दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने से किया इनकार, महिपालपुर को रंगपुरी नाम देने की याचिका खारिज

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने के मामले में साफ कहा कि वह सरकार या दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने से किया इनकार, महिपालपुर को रंगपुरी नाम देने की याचिका खारिज

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने के मामले में साफ कहा कि वह सरकार या दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने महिपालपुर मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

यह याचिका रंगपुरी गांव के निवासियों के संगठन 'कल्याण संघ' ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि महिपालपुर मेट्रो स्टेशन उनके इलाके रंगपुरी गांव के बहुत करीब है और आसपास के लोग इसे रंगपुरी के नाम से ही जानते हैं, इसलिए स्टेशन का नाम बदलकर रंगपुरी मेट्रो स्टेशन किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को सुविधा हो और इलाके की पहचान बनी रहे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नाम से यात्रियों को भ्रम होता है और स्थानीय निवासियों को अपनी पहचान से वंचित महसूस होता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मेट्रो स्टेशनों के नामकरण का फैसला सरकार का नीतिगत मामला है। यह कार्यकारी क्षेत्र में आता है और न्यायालय इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता, जब तक कि नामकरण प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी न हो या संविधान के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन न कर रही हो। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई दलीलें पर्याप्त नहीं हैं कि नाम बदलना जरूरी हो। नामकरण में स्थानीय भावनाओं का ध्यान रखा जाता है, लेकिन यह सरकार की नीति और प्रशासनिक सुविधा पर निर्भर करता है।

कोर्ट ने आगे कहा कि डीएमआरसी और सरकार ने पहले ही इस तरह की मांगों पर विचार किया है और कई स्टेशनों के नाम बदलने के फैसले लिए हैं, लेकिन हर मांग को स्वीकार करना जरूरी नहीं है। याचिका में कोई ऐसा ठोस आधार नहीं दिखा कि मौजूदा नाम असंवैधानिक या भेदभावपूर्ण है, इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो सरकार या डीएमआरसी के सामने सीधे अपनी मांग रख सकते हैं।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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