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दिल्ली हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी, केवल तेज रफ्तार से चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता

दिल्ली हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी, केवल तेज रफ्तार से चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता
दिल्ली हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी, केवल तेज रफ्तार से चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता

नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने सड़क हादसों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल वाहन का तेज रफ्तार से चलना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि चालक ने लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी चालक को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि उसकी ड्राइविंग वास्तव में लापरवाहीपूर्ण या असावधानीपूर्ण थी।

न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार की उस अपील को खारिज करते हुए की, जिसमें वर्ष 2009 के एक सड़क हादसे में महिला की मौत के मामले में टेंपो चालक को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

अदालत ने कहा, "वाहन तेज चलाने के लिए ही बनाए जाते हैं। केवल यह तथ्य कि वाहन तेज गति से चल रहा था, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि चालक लापरवाह या असावधान था। 'हाई स्पीड' और 'ओवर स्पीड' सापेक्ष शब्द हैं।"

मामला 12 नवंबर 2009 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नरेश पार्क एक्सटेंशन इलाके में एक टेंपो ने कथित तौर पर तेज और लापरवाही से चलाते हुए साइकिल को टक्कर मार दी थी। साइकिल पर एक युवक अपनी मां के साथ जा रहा था। आरोप था कि टेंपो का अगला पहिया महिला के सिर पर चढ़ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

निचली अदालत ने अगस्त 2013 में चालक को बरी कर दिया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने 2016 में हाई कोर्ट में अपील दायर की।

हाई कोर्ट ने कहा कि मृतक महिला का बेटा इस मामले में अभियोजन पक्ष का एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी था। उसने बयान दिया कि टेंपो बहुत तेज गति से और लापरवाही से चल रहा था, लेकिन वह यह नहीं बता सका कि चालक की ड्राइविंग किस तरह लापरवाहीपूर्ण थी। वह टेंपो की अनुमानित गति भी नहीं बता पाया।

अदालत ने कहा कि किसी सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चालक लापरवाह था।

हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह बताने के लिए ठोस सामग्री पेश करनी चाहिए थी कि मामले की परिस्थितियों में "तेज रफ्तार" का क्या अर्थ था। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में केवल दुर्घटना के आधार पर चालक की लापरवाही नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभासों का भी उल्लेख किया। प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया था कि टक्कर लगने से वह सड़क पर गिर गया, लेकिन उसके शरीर पर किसी चोट का कोई चिकित्सीय रिकॉर्ड नहीं था। साथ ही, वाहन के मैकेनिकल निरीक्षण में टेंपो के बाएं हिस्से पर हल्का डेंट मिला, जबकि गवाह के बयान के अनुसार दुर्घटना की स्थिति अलग होनी चाहिए थी।

इन तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष चालक की लापरवाही या असावधानी साबित करने में विफल रहा। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए दिल्ली सरकार की अपील खारिज कर दी।

--आईएएनएस

डीएससी

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