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दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 साल की यौन शोषण पीड़िता को 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दी, वीडियो में कहा- यह मानवाधिकार का मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 साल की यौन शोषण पीड़िता को 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दी, वीडियो में कहा- यह मानवाधिकार का मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 साल की यौन शोषण पीड़िता को 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि एक नाबालिग से बच्चे को जन्म देने और उसकी परवरिश की जिम्मेदारी उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब वह खुद किशोरावस्था से गुजर रही हो। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में गर्भावस्था समाप्त करने का अधिकार केवल यौन हिंसा की शिकार महिला के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मानवाधिकार के रूप में भी देखा जाना चाहिए।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की पीठ ने 15 अक्टूबर को यह आदेश दिया। अदालत के सामने पीड़िता की ओर से गवस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी गई थी। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि नाबालिग इस प्रक्रिया से गुजरने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम है। इसके बाद अदालत ने पीड़िता के हितों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका स्वीकार कर ली।

‘प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर करना सम्मानजनक जीवन को प्रभावित कर सकता है’

हाईकोर्ट ने कहा कि यौन शोषण की शिकार नाबालिग को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। अदालत के मुताबिक, किशोरावस्था में पहुंची पीड़िता पर बच्चे को जन्म देने और उसकी परवरिश का बोझ डालना उचित नहीं होगा।कोर्ट ने इस मामले को केवल गर्भावस्था समाप्त करने के कानूनी अधिकार के नजरिए से नहीं देखा, बल्कि पीड़िता के मानवाधिका और उसके भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों को भी महत्वपूर्ण माना।

सामान्य मामलों में 20 और विशेष परिस्थितियों में 24 हफ्ते की सीमा

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत सामान्य परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक गर्भावस्था समाप्त की जा सकती है। कुछ निर्धारित श्रेणियों में, जिनमें यौन शोषण की पीड़िताएं भी शामिल हैं, कानून के तहत यह सीमा 24 सप्ताह तक है।इस मामले में गर्भावस्था 31 सप्ताह की हो चुकी थी, यानी निर्धारित समय-सीमा से आगे निकल गई थी। ऐसे में अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों, मेडिकल बोर्ड की राय और नाबालिग के हितों पर विचार करते हुए अनुमति दी। यह आदेश मामले की परिस्थितियों के आधार पर दिया गया है; इसे हर मामले में अपने आप लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।

लेडी हार्डिंग अस्पताल को प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

पीड़िता पहले से दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती है। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को गर्भावस्था समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े जरूरी चिकित्सकीय प्रबंध किए जाएं।कोर्ट ने भ्रूण के टिश्यू को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, ताकि यौन शोषण से जुड़े आपराधिक मामले में DNA जांच के लिए उसका इस्तेमाल किया जा सके। इससे जांच एजेंसियों को मामले में जरूरी साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सकती है।

इलाज का खर्च सरकार उठाएगी

अदालत ने राज्य सरकार को गर्भावस्था समाप्त करने की प्रक्रिया और अस्पताल में रहने सहित जरूरी चिकित्सा खर्च वहन करने का निर्देश भी दिया। साथ ही, यदि प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो अस्पताल प्रशासन को उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

इस फैसले में हाईकोर्ट ने नाबालिग की उम्र, स्वास्थ्य, गरिमा और उसके सर्वोत्तम हित को प्रमुखता दी। अदालत का कहना है कि यौन हिंसा की शिकार नाबालिग के मामले में गर्भावस्था समाप्त करने के अनुरोध पर विचार करते समय उसके मानवाधिकारों और सम्मानजनक जीवन के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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