दिल्ली: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का हल्ला बोल, यूथ कांग्रेस बोली- जारी रहेगा संघर्ष
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर को रोकने की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच सुरक्षा के मद्देनजर 11 मेट्रो स्टेशनों के बंद किया गया है और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के फैसले का यूथ कांग्रेस ने विरोध जताया है।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक इस्तीफा नहीं होता, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
उदय भानु चिब ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए देश के युवा और आम भारतीय आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार और पुलिस उस आवाज को रोकने का प्रयास कर रही है। देश के लोकतंत्र पर डाका डाला गया है। दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं, जगह-जगह पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग की गई है, लेकिन इसके बावजूद यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रस्तावित मार्च में पहुंचेंगे। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संकल्प के सामने बैरिकेडिंग आंदोलन को नहीं रोक सकती।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संगठन की मांग स्पष्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, विरोध और संघर्ष जारी रहेगा। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे। राहुल गांधी के सिपाही हर कीमत पर यहां पहुंचेंगे और मार्च करेंगे। लोकतंत्र से जुड़े सवालों को लेकर उनका आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और नागरिकों की आवाज है।
तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों की ओर से ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग किए जाने के सवाल पर उदय भानु चिब ने इन सांसदों पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन्हें 'आया राम-गया राम' बताते हुए कहा कि दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए कानून में सख्त प्रावधान होना चाहिए। अगर कोई सांसद या विधायक जिस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतता है, बाद में उसी पार्टी को छोड़ देता है, तो इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ता है। मतदाता किसी उम्मीदवार को केवल व्यक्तिगत आधार पर नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक दल और विचारधारा को ध्यान में रखकर भी वोट देता है।
उन्होंने कहा कि वोट जनता की ओर से दिया जाने वाला सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार और विश्वास है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलना मतदाताओं के साथ धोखा है। चाहे राज्य की विधानसभा हो या संसद, दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों को लेकर कानून में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे मतदाताओं के भरोसे की रक्षा हो सके।
उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि जो लोग दल बदलकर जनता के जनादेश का सम्मान नहीं करते, उन्हें लोकतंत्र पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के मत और उसके विश्वास का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए चाहे जितनी पुलिस तैनात कर दी जाए या मेट्रो स्टेशन बंद किए जाएं, संगठन लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को लेकर आंदोलन जारी रखेगा।
--आईएएनएस
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