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दिल्ली: बुराड़ी थाने के हेड कांस्टेबल ने भीषण आग में फंसे 13 लोगों को बचाया

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16/17 मई की रात करीब 2:30 बजे बुराड़ी के दारोगा बाजार में आग लग गई। इसी दौरान, बुराड़ी थाने के हेड कांस्टेबल अमर सिंह (बीट ऑफिसर) को एक स्थानीय निवासी से आग लगने की सूचना मिली। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पाया कि भूतल पर स्थित आठ दुकानें आग की चपेट में थीं और आग की लपटें इमारत की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच चुकी थीं और सीढ़ियां पूरी तरह से आग में जल रही थीं। उन्होंने यह भी देखा कि इमारत की दूसरी मंजिल पर एक पुरुष और एक महिला आग में फंसे हुए थे। दोनों ही भागने में असमर्थ रहे क्योंकि घने, जहरीले धुएं और भीषण लपटों ने सभी निकास मार्गों को अवरुद्ध कर दिया था। मुख्य द्वार आग की लपटों में घिरा हुआ था। लोग दहशत में इधर-उधर भाग रहे थे और कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। स्थानीय निवासियों ने स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग को भी सूचना दे दी है।
दिल्ली: बुराड़ी थाने के हेड कांस्टेबल ने भीषण आग में फंसे 13 लोगों को बचाया

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 16/17 मई की रात करीब 2:30 बजे बुराड़ी के दारोगा बाजार में आग लग गई। इसी दौरान, बुराड़ी थाने के हेड कांस्टेबल अमर सिंह (बीट ऑफिसर) को एक स्थानीय निवासी से आग लगने की सूचना मिली। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पाया कि भूतल पर स्थित आठ दुकानें आग की चपेट में थीं और आग की लपटें इमारत की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच चुकी थीं और सीढ़ियां पूरी तरह से आग में जल रही थीं। उन्होंने यह भी देखा कि इमारत की दूसरी मंजिल पर एक पुरुष और एक महिला आग में फंसे हुए थे। दोनों ही भागने में असमर्थ रहे क्योंकि घने, जहरीले धुएं और भीषण लपटों ने सभी निकास मार्गों को अवरुद्ध कर दिया था। मुख्य द्वार आग की लपटों में घिरा हुआ था। लोग दहशत में इधर-उधर भाग रहे थे और कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। स्थानीय निवासियों ने स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग को भी सूचना दे दी है।

जान-माल के नुकसान को भांपते हुए हेड कॉन्टेबल अमर सिंह ने जरा भी समय बर्बाद किए बिना, सबसे पहले आग से घिरी जगह के पास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और वहां से गुजर रहे एक ट्रक को रुकवाया। अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। वे ट्रक की छत पर चढ़ गए और दूसरी मंजिल की बालकनी के नीचे पहुंच गए। लगभग शून्य दृश्यता और ढहते हुए कमरे के बावजूद, उन्होंने संकट में फंसे पीड़ितों को पुकारा और उन्हें एक-एक करके अपने कंधों पर और फिर ट्रक की छत पर उठाया। जहरीले धुएं और भीषण आग के बावजूद, उन्होंने धुएं के कारण बेहोश होने से पहले सभी पीड़ितों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

उन्हें यह भी पता चला कि कुछ दृष्टिबाधित छात्र पास की इमारत में फंसे हुए हैं और आग जल्द ही वहां भी पहुंच सकती है। उन्होंने तुरंत पास की इमारत में अलार्म बजाया और सभी ग्यारह दृष्टिबाधित छात्रों को इमारत की सीढ़ियों के माध्यम से सुरक्षित निकाल लिया गया।

उपरोक्त सभी बचाव अभियान हेड कॉन्सटेबल अमर सिंह ने अकेले ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही अंजाम दिया। अपने जीवन को खतरे में डालकर उन्होंने जो असाधारण वीरता और निस्वार्थता का परिचय दिया, उससे अनमोल मानव जीवन की रक्षा हुई।

--आईएएनएस

एमएस/

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