Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में क्यों ढही 5 मंजिला इमारत? बेसमेंट की खुदाई से लेकर MCD की निगरानी तक उठे सवाल
देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर इमारतों की सुरक्षा और कथित अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक सत्य निकेतन इलाके में ‘हॉस्टल डेज़’ नाम की पांच मंजिला PG इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
शुरुआती जानकारी और स्थानीय स्तर पर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत काफी पुरानी बताई जा रही थी। इसी बीच उसके निचले हिस्से में बेसमेंट और कमर्शियल स्पेस तैयार करने के लिए निर्माण कार्य चलने की बात सामने आई है। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या बेसमेंट के लिए की गई खुदाई ने पहले से कमजोर ढांचे की नींव को प्रभावित किया।
पुरानी इमारत में बेसमेंट की खुदाई क्यों बनी चिंता?
किसी तैयार इमारत के नीचे नई खुदाई करना सामान्य निर्माण कार्य से कहीं ज्यादा जटिल होता है। खासकर जब इमारत कई दशक पुरानी हो, तब उसकी नींव, मिट्टी की स्थिति और लोड-बेयरिंग क्षमता की तकनीकी जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
यदि खुदाई के दौरान नींव को सहारा देने वाली मिट्टी हट जाए या मौजूदा पिलरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगे, तो पूरे स्ट्रक्चर की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञों की निगरानी के बिना इस तरह का काम जोखिम भरा माना जाता है।
क्या मौजूदा इमारत के नीचे बेसमेंट बनाना कानूनी है?
किसी जमीन का मालिक होना अपने आप में यह अधिकार नहीं देता कि वह मौजूदा इमारत के नीचे मनमाने तरीके से खुदाई शुरू कर दे। निर्माण या संरचनात्मक बदलाव के लिए संबंधित स्थानीय प्राधिकरण की अनुमति और स्वीकृत भवन योजना का पालन जरूरी होता है।
यदि मूल स्वीकृत नक्शे में बेसमेंट का प्रावधान नहीं है और बाद में बेसमेंट बनाने की योजना बनाई जाती है, तो नियमानुसार आवश्यक मंजूरी
और तकनीकी प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, ऐसे काम से पहले इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास की संपत्तियों पर संभावित प्रभाव का आकलन भी महत्वपूर्ण है।
UBBL और दिल्ली के बिल्डिंग नियम क्या कहते हैं?
दिल्ली में भवन निर्माण और बेसमेंट से जुड़े नियम Unified Building Bye-Laws (UBBL), 2016 और संबंधित मास्टर प्लान के प्रावधानों के तहत नियंत्रित होते हैं।
बेसमेंट निर्माण में सामान्य तौर पर स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, निर्धारित निर्माण मानकों, सुरक्षा व्यवस्था, जल निकासी और वॉटरप्रूफिंग जैसे पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी होता है।
खास बात यह है कि निर्माण के दौरान पड़ोसी इमारत की नींव या संरचना को नुकसान न पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी भी निर्माण कराने वाले पक्ष पर होती है। ऐसे मामलों में तकनीकी जांच और जरूरी सुरक्षा उपायों की अनदेखी गंभीर समस्या बन सकती है।
इंजीनियरिंग के लिहाज से क्यों जोखिम भरी है ऐसी खुदाई?
पुरानी बहुमंजिला इमारत के नीचे सीधे खुदाई शुरू करना कई कारणों से खतरनाक हो सकता है।
पहला खतरा—नींव के आसपास की मिट्टी:
खुदाई के दौरान अगर नींव को सहारा देने वाली मिट्टी हट जाती है तो स्ट्रक्चर का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे इमारत के कुछ हिस्सों पर अचानक ज्यादा भार आ सकता है।
दूसरा—सपोर्ट सिस्टम की जरूरत:
ऐसे जटिल निर्माण कार्य में कई मामलों में मौजूदा संरचना को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी सपोर्ट और चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों की निगरानी के बिना सीधे भारी मशीनरी से खुदाई करना जोखिम बढ़ा सकता है।
तीसरा—पिलर और बीम पर अतिरिक्त दबाव:
नींव प्रभावित होने पर इमारत के लोड-बेयरिंग कॉलम और बीम पर असामान्य दबाव पड़ सकता है। अगर स्ट्रक्चर इस दबाव को सहन नहीं कर पाता तो गंभीर नुकसान हो सकता है।
हादसे के बाद MCD की भूमिका पर भी सवाल
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। यहां जमीन और कमर्शियल स्पेस की मांग ज्यादा होने के कारण पुरानी इमारतों में अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी इमारत में कई दिनों से निर्माण या खुदाई चल रही थी, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी कब मिली? क्या निर्माण शुरू होने से पहले अनुमति और स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच हुई थी? और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब जांच से सामने आएगा असली कारण
पुलिस ने मामले में लापरवाही से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। अब जांच में यह स्पष्ट होना अहम होगा कि इमारत गिरने के पीछे वास्तविक तकनीकी कारण क्या था और क्या निर्माण कार्य ने उसकी संरचनात्मक मजबूती को प्रभावित किया।
सत्य निकेतन का यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि पुरानी इमारतों में निर्माण, बेसमेंट की खुदाई, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े कई सवाल सामने लाता है।
अगर किसी इमारत में बदलाव करने से पहले उसकी संरचनात्मक सुरक्षा की जांच न हो और नियमों की निगरानी कमजोर रहे, तो छोटी सी निर्माण संबंधी गलती भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इसलिए जरूरत सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले जोखिम की पहचान और रोकथाम की व्यवस्था मजबूत करने की है।

