दिल्ली एयरपोर्ट पर 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल की तैयारी की समीक्षा, नागरिक उड्डयन मंत्री ने की बैठक
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर हब-एंड-स्पोक मॉडल लागू करने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने एयरपोर्ट पर सभी प्रमुख एजेंसियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, बीसीएएस, कस्टम, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, डीजीसीए, सीआईएसएफ, डिजीयात्रा, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और प्रमुख एयरलाइंस के अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री ने टर्मिनल-3 के सिक्योरिटी होल्ड एरिया का दौरा कर यात्री आवागमन और सुरक्षा व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।
सरकार की योजना है कि भारत को 2030 तक घरेलू यात्रियों के लिए और 2047 तक वैश्विक स्तर पर एक बड़ा एविएशन हब बनाया जाए। इसी दिशा में हब-एंड-स्पोक मॉडल तैयार किया गया है।
राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति इसे पूर्व और पश्चिम के बीच एक मजबूत ट्रांजिट हब बनने का मौका देती है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल से छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अभी करीब 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के जरिए यात्रा करते हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे भारतीय एयरपोर्ट ही प्रमुख ट्रांजिट हब बनें।
मंत्री के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट हर साल 10 करोड़ से ज्यादा यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है और उत्तरी भारत के करीब 50 प्रतिशत यात्री ट्रैफिक को संभालता है, जिससे यह एक प्राकृतिक हब बनता है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत छोटे शहरों से आने वाले यात्रियों को बड़े एयरपोर्ट (हब) के जरिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रा समय कम होगा और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
इस योजना से आर्थिक लाभ भी होगा। अनुमान है कि 2047 तक इससे करीब 1.6 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर का फायदा मिलेगा।
सरकार कार्गो (माल ढुलाई) क्षेत्र को भी मजबूत बनाने पर ध्यान दे रही है। इसके लिए डिजिटल सिस्टम और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि डिजीयात्रा जैसी तकनीकों से यात्रियों की आवाजाही और आसान होगी। साथ ही, एयरलाइंस भी लंबी दूरी की उड़ानों के लिए नए विमान खरीद रही हैं, जिससे भारत का एविएशन सेक्टर और मजबूत होगा।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत को आने वाले वर्षों में एक प्रमुख वैश्विक एविएशन हब के रूप में विकसित किया जाए।
--आईएएनएस
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