दिल्ली: चिन्मय अमृत महोत्सव महासम्मेलन 23 अक्टूबर से, युवाओं को गीता से जोड़ना मिशन का लक्ष्य: स्वामी स्वरूपानंद
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर 23 से 25 अक्टूबर को दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव महासम्मेलन' आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद ने मिशन की यात्रा, उसके मूल उद्देश्य और युवाओं को श्रीमद्भगवद्गीता से जोड़ने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि चिन्मय मिशन की स्थापना का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहे 'चिन्मय अमृत महोत्सव महासम्मेलन' में देश-विदेश से हजारों लोग हिस्सा लेंगे।
स्वामी स्वरूपानंद ने बताया कि चिन्मय मिशन की शुरुआत पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज ने की थी। स्वामी चिन्मयानंद पहले पत्रकार थे और हिमालय इसलिए गए थे कि वे जान सकें कि साधु-संत आखिर क्या करते हैं। वहां उनकी मुलाकात स्वामी शिवानंद और स्वामी तपोवन जैसे संतों से हुई, जिनके जीवन ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि हिमालय में वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करने के बाद स्वामी चिन्मयानंद को महसूस हुआ कि भारत के युवाओं को अपने गौरवशाली ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसके बाद उन्होंने पूरे देश में वेदांत और गीता का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया।
स्वामी स्वरूपानंद के अनुसार, स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि जब व्यक्ति बदलता है, तभी राष्ट्र बदलता है। इसी सोच के साथ उन्होंने देशभर में गीता ज्ञान यज्ञ शुरू किए, जिनके माध्यम से लोगों को जीवन के उद्देश्य, कर्तव्य और मूल्यों की शिक्षा दी गई।
उन्होंने बताया कि आज चिन्मय मिशन का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर दुनिया के बड़े शहरों तक फैला हुआ है। मिशन शिक्षा, संस्कार, युवा विकास, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। बच्चों, युवाओं, गृहस्थों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि चिन्मय मिशन अपनी स्थापना के 75वें वर्ष पर चिन्मय अमृत महोत्सव मना रहा है। इसके तहत देश और विदेश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हनुमान चालीसा पाठ, श्रीमद्भगवद्गीता जागरूकता अभियान और युवाओं के लिए विशेष यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है। हजारों युवा गांवों और शहरों में जाकर भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का संदेश दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि चिन्मय अमृत महोत्सव का प्रमुख आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। इसमें भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों से चिन्मय मिशन परिवार के सदस्य, श्रद्धालु और सेवक शामिल होंगे।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि सम्मेलन में सेवा, संस्कृति, वेदांत और भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी तक गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद का ज्ञान और सेवा का संदेश पहुंचाना है।
युवाओं के संबंध में उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि सभी युवा भटक गए हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा और उद्देश्य देने की आवश्यकता है। श्रीमद्भगवद्गीता युवाओं को आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और जीवन का लक्ष्य प्रदान करती है।
उन्होंने गीता के प्रसिद्ध श्लोक 'उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्' का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति को स्वयं अपने विकास का प्रयास करना चाहिए और कभी भी स्वयं को निराश नहीं होने देना चाहिए। मनुष्य का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु होता है।
उन्होंने बताया कि युवाओं को गीता से जोड़ने के लिए चिन्मय मिशन नियमित रूप से युवा केंद्र, स्टडी ग्रुप, संवाद सत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा भारतीय ज्ञान परंपरा को समझते हैं और जीवन की चुनौतियों का समाधान खोजते हैं।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल धार्मिक शिक्षा देना नहीं है, बल्कि ऐसे जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय संस्कृति, वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता के मूल्यों से जुड़कर युवा न केवल अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
--आईएएनएस
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