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देहरादून में घंटाघर के पास अवैध मजार ध्वस्त, प्रशासन की देर रात की कार्रवाई

देहरादून, 9 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में घंटाघर के पास सरकारी भूमि पर बनी एक अवैध मजार को जिला प्रशासन और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर रात ध्वस्त कर दिया।
देहरादून में घंटाघर के पास अवैध मजार ध्वस्त, प्रशासन की देर रात की कार्रवाई

देहरादून, 9 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में घंटाघर के पास सरकारी भूमि पर बनी एक अवैध मजार को जिला प्रशासन और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर रात ध्वस्त कर दिया।

यह कार्रवाई नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की गई है और सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित निर्माण को पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था और नियमानुसार नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित समय दिया गया था। तय अवधि समाप्त होने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर देर रात बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई। इस दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि घंटाघर क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं में भी बाधा उत्पन्न करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई को रात के समय अंजाम दिया गया, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।

एमडीडीए के अधिकारियों ने कहा कि अवैध निर्माण को लेकर पूर्व में कई बार जांच की गई थी और दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि मजार सरकारी भूमि पर बनाई गई थी। नियमानुसार सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरी तरह अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। भविष्य में भी शहर में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे कानून का पालन करें और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या अतिक्रमण से बचें। प्रशासन का कहना है कि शहर के सुव्यवस्थित विकास और सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी

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