CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत पर आज फैसला! मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने से बढ़ा विवाद
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत का मामला लगातार चर्चा में है। सोमवार दोपहर दोनों नेताओं को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना है। यहां उनकी जमानत पर फैसला होने की उम्मीद है।
इस बीच, दोनों नेताओं की जमानत से जुड़े मामले में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी मिलने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। हालांकि, धमकी देने वाले की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।CJP ने आरोप लगाया है कि आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। दोनों नेता 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिया था।
जमानत की सुनवाई के बजाय धमकी वाले संदेश पर चर्चा का आरोप
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, रविवार को जमानत पर सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट और सरकारी वकील दोपहर 12 बजे से इंतजार के बाद शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे। पार्टी का आरोप है कि सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं की रिहाई पर ध्यान देने के बजाय मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश पर चर्चा की गई।
रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि धमकी वाले संदेश का आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत से क्या संबंध है। उन्होंने दावा किया कि CJP ने संदेश भेजने वाले की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया है।
चार जमानतदारों के दस्तावेज खारिज करने पर CJP ने उठाए सवाल
CJP ने जमानत की प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों नेताओं के जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच में समय लगाया गया। पार्टी के मुताबिक, चार जमानतदारों को स्पष्ट कारण बताए बिना खारिज कर दिया गया।
पार्टी ने बैंक की मुहर वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद को दोबारा मंजूरी के लिए पेश करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए जमानत की प्रक्रिया में देरी की जा रही है।
पार्टी का कहना है कि आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई के लिए उसकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी से अब तक क्या-क्या हुआ?
10 अक्टूबर: प्रदर्शन से पहले तीन नेताओं को हिरासत में लिया गया
CJP ने SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। उसी दिन सुबह पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
13 अक्टूबर: तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे आशुतोष और सौरव
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद आशुतोष रांका और सौरव दास तिरंगा लेकर वहां पहुंचे। उनके साथ कुछ अन्य प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।
इसके बाद दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर से तिहाड़ जेल में रखा गया। उनकी रिहाई को लेकर CJP लगातार सवाल उठा रही है।
16-17 अक्टूबर: अभिजीत दीपके को मिली जमानत
आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत के विरोध में CJP ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली आयोजित की थी।
रैली से पहले अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्हें 50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिल गई। अब पार्टी के बाकी दो नेताओं की रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
तिरंगा मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं FIR
CJP के तिरंगा मार्च के संबंध में दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कम से कम तीन FIR दर्ज की थीं। इनमें CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं समेत कई लोगों के नाम शामिल बताए गए।FIR कनॉट प्लेस और मंडी हाउस थानों में दर्ज की गईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने, सड़क के बीच मार्च निकालने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं।
CJP पहले भी कर चुकी है लंबा प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी ने इससे पहले NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से 25 जुलाई तक प्रदर्शन किया था। पार्टी के मुताबिक, यह आंदोलन 36 दिनों तक चला। इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे।
20 जुलाई को पार्टी ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश भी की थी। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़े इस प्रदर्शन को समाप्त कर दिया गया था।फिलहाल, आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत का मामला CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। दोनों नेताओं की रिहाई पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का फैसला अहम होगा।

