Samachar Nama
×

दत्तात्रेय होसबाले के बयान को मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का समर्थन, ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर दिखाया नया रुख

बरेली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आरएसएस, धार्मिक बयानबाजी, जनसंख्या और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कई अहम बातें कहीं।
दत्तात्रेय होसबाले के बयान को मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का समर्थन, ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह पर दिखाया नया रुख

बरेली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आरएसएस, धार्मिक बयानबाजी, जनसंख्या और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कई अहम बातें कहीं।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आईएएनएस से कहा कि दत्तात्रेय होसबाले का वाशिंगटन डीसी में दिया गया बयान (हिंदुओं ने कभी किसी पर हमला नहीं किया) बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास भी इस बात का गवाह है कि हिंदुओं ने कभी किसी पर युद्ध नहीं थोपा। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम का इतिहास भी बताता है कि इस्लाम की कभी हिंदुओं, सनातन धर्म, आर्य समाज, बौद्ध, जैन, सिख धर्म से लड़ाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इतिहास में इस्लाम का टकराव मुख्य रूप से यहूदियों और ईसाइयों से रहा है और आज भी जो वैश्विक स्तर पर संघर्ष दिख रहा है (जैसे अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान) वह भी उसी संदर्भ में देखा जा सकता है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मोहन भागवत के 'भारत को विश्व गुरु बनाने' के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश का विकास होना जरूरी है। जब भारत आगे बढ़ेगा, तो यहां रहने वाले सभी लोगों (चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान) की तरक्की होगी।

उन्होंने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया और सीने पर पत्थर रखकर राम मंदिर निर्माण के फैसले को माना, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में अन्य मस्जिदों जैसे ज्ञानवापी (वाराणसी) और ईदगाह (मथुरा) को लेकर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।

धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि उनकी बातें अक्सर विवाद पैदा करने वाली होती हैं और समाज में विभाजन को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की संख्या को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह हर व्यक्ति का अधिकार है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बेंगलुरु में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) के दौरान छात्रों के साथ हुए कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जनेऊ को लेकर छात्रों के साथ किया गया व्यवहार नाइंसाफी है और यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मांग की कि राज्य सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और सुनिश्चित करे कि किसी भी धर्म के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निष्पक्ष और न्यायपूर्ण माहौल जरूरी है।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

Share this story

Tags