दमोह में पीएम मोदी की इस योजना से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी
दमोह, 7 जनवरी (आईएएनएस)। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले गरीब तबके के बच्चों की पोषण आहार वितरण कार्य योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पीएम पोषण योजना के माध्यम से न सिर्फ बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि महिलाओं को भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में पीएम पोषण योजना के तहत 1555 महिला स्व-सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से करीब 3800 महिला रसोइयों को रोजगार मिला है।
तेंदूखेड़ा विकासखंड अंतर्गत शासकीय एकीकृत शाला सहजपुर में बीते 25 वर्षों से लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्कूलों में बच्चों के लिए स्वच्छ, पौष्टिक और समय पर भोजन तैयार कर रही हैं। जहां इससे बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, वहीं ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्थायी आय का साधन भी मिल रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से योजना में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जिम्मेदारी बढ़ी है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को और सशक्त करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार और बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके।
महिला रसोइया प्रेमरानी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए बताया कि मैं बीते 35 वर्षों से इस स्कूल में खाना बनाकर बच्चों की थाली में परोस रही हूं। पहले मुझे 400 रुपए प्रतिमाह मिलते थे, अब 4000 मासिक मिलने लगे हैं। इससे हमारी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। घर की सूरत बदल गई है और हमारे हाथ मजबूत हुए हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं।
शोभा रानी ने कहा कि जब से महिला स्व-सहायता समूह को काम मिला है, तब से हमें काम करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है।
सुनीता ने बताया कि पहले हमारे गांव में पलायन की समस्या बहुत थी। लोग अक्सर कामकाज की तलाश में दूसरे शहर चले जाते थे, लेकिन अब गांव में ही महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, जिससे हमारे हाथों को मजबूती मिली है और घर में खुशहाली आ गई है।
प्रीति पाल ने बताया कि मैं 10 वर्ष से काम कर रही हूं। अब चार हजार रुपए मिल रहे हैं। गांव में ही रोजगार मिल गया है। बहुत अच्छे से सब कुछ हो रहा है।
सुमन ने कहा कि मैं काफी समय से काम कर रही हूं। पहले 400 रुपए मिलते थे, अब 4000 रुपए मिलते हैं। घर के पास ही काम मिल गया है। काफी अच्छा लगता है। परिवार भी अच्छे से चल रहा है।
वहीं, छात्र प्रदीप ने बताया कि खाना बहुत अच्छा होता है। सब्जी रोज मिलती है। खीर-पूरी भी दी जाती है। छात्रा रिया ने कहा कि खाना बहुत स्वादिष्ट होता है। हमें बहुत अच्छा लगता है।
--आईएएनएस
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