Samachar Nama
×

दादा माजरा का डपिंग ग्राउंड लोगों के लिए खतरा बन चुका है : प्रेम गर्ग

दादा माजरा का डपिंग ग्राउंड लोगों के लिए खतरा बन चुका है : प्रेम गर्ग
दादा माजरा का डपिंग ग्राउंड लोगों के लिए खतरा बन चुका है : प्रेम गर्ग

चंडीगढ़, 22 अगस्त (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के कोर कमेटी के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि दादा माजरा में स्थित डपिंग ग्राउंड में लोगों के लिए खतरा बन चुका है।

उन्होंने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की है, ताकि आम लोगों को पता चल सके कि हम लोग मौजूदा समय में हम लोग जहरीले पहाड़ के पास बैठे हुए हैं। पूरी आबोहवा जहरीली हो चुकी है। अभी कूड़ा नहीं उठाया गया है। अभी पूरा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। लेकिन, अफसोस की बात है कि कोर्ट में भी इन लोगों ने झूठ बोलने का काम किया है। ये बार-बार कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके यह दावा कर रहे हैं कि हमने कूड़ा हटवा दिया है। लेकिन, अफसोस की बात है कि अभी तक कूड़ा नहीं हटवाया गया है। अगर समय रहते मौजूदा स्थिति को सामान्य करने की दिशा में काम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

प्रेम गर्ग के मुताबिक, हम लोगों ने 70-75 लाख रुपए की लागत से डीपीआर बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, अफसोस की बात है कि बाद में इन लोगों ने डीपीआर को भी खत्म कर दिया है। इस तरह से इसमें लगाया गया पैसा भी बर्बाद चला गया। अब भाजपा के पास क्या प्लान है, इस बारे में खुलकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि आगे की तस्वीर साफ हो सके। अब इन लोगों ने हाथ खड़े दिए। ऐसी स्थिति में हमें शुरू से सारे काम करने होंगे। इस वजह से आगामी दिनों में पूरी प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि दादा माजरा के ऊपर जो कचरा बढ़ता गया, इसके बाद वो दब गया। इसे हम लिगेजी बेस्ड भी बोलते हैं। इसे उठाने का अनुबंध दो कंपनियों को दिया गया। 70 करोड़ रुपए का यह ठेका दिया गया। इसका उद्देश्य यही था कि इसके अंदर दबे कूड़े को बाहर निकाले और इसका किसी दूसरी चीज में इस्तेमाल किया जाए, ताकि आगे की पूरी प्रक्रिया आसान हो सके। लेकिन, कॉरपोरेशन की ओर से कोई सुपरवाइजर भी नहीं रखा गया है, ताकि यह साफ हो सके कि कितने ट्रक रवाना हो जाए। इस वजह से पूरी प्रक्रिया जटिल हो सके। हमें यहां यह समझना होगा कि बायो सेल बिकती है। अब ऐसी स्थिति में सवाल यही है कि यह पैसा कहां पर गया। ये पैसा कॉरपोरेशन को मिलना था या ठेकेदार को। इस संबंध में अब तक कोई सुधार नहीं आया। वहीं, आईओसीएल का सर्वे भी सामने आया है कि 10 से 12 मीटर तक कूड़ा अभी-भी दबा हुआ है। उसी कूड़े को निकालना था, उसे ही लेगेसी बेस्ड कहते हैं। लेगेसी बेस्ड मतलब ही होता है कि जो कूड़ा पिछले कई सालों से अंदर दबा हुआ है, उसे बाहर निकाले। अगर हम उसे बाहर नहीं निकालते हैं, तो ऐसी स्थिति में उसमें से मीथेन गैर बनेगी। उससे कैमिकल रिएक्शन भी होगा, क्योंकि इसमें पानी सहित अन्य पदार्थ भी समाहित होते हैं। मीथेन का जहरीली गैस है। अब यह आम लोगों के बीच पहुंचेगी, तो इससे स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगी।

आप नेता के मुताबिक, सवाल यह है कि इसका जिम्मेदार कौन है? अब इन लोगों ने इस पर मिट्टी डालकर काम चला दिया है। लेकिन, इस पर किसी भी प्रकार की निर्माण से संबंधित गतिविधियां शुरू नहीं हो पाएगी। ऐसी जमीन पर ना ही कोई बिल्डिंग बनाई जाएगी और ना ही किसी भी प्रकार का प्लांट लगाया जाएगा। हर बार यह लोग तर्क देते हैं कि हम यहां पर क्रिकेट ग्राउंड बना देंगे या कोई दूसरा प्रतिष्ठान बना देंगे। कितनी बार गवर्नर आए? इन्होंने कई प्लांटों का उद्घाटन किया। लेकिन, सवाल यह है कि अब तक कितने प्लांट चल रहे हैं। अब तक कोई प्लांट नहीं चल रहा है।

--आईएएनएस

एसएचके/एमएस

Share this story

Tags