होली के त्योहार के आते ही बाजारों में गन्ना और खीरा की बिक्री शुरू हो जाती है। यह दोनो ही ऐसे फल और सब्जियां हैं जो बच्चों से लेकर बड़ों तक, और युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आते हैं। खासकर खीरा, जिसे लोग अपने खाने और डाइट में अलग-अलग तरीकों से शामिल करते हैं।
खीरा अपने हल्के स्वाद, पानी की मात्रा और ताजगी के लिए लोकप्रिय है। एक्सरसाइज करने वाले इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं, क्योंकि यह कैलोरी में कम और पोषक तत्वों में भरपूर होता है। वहीं, कुछ लोग इसे चाट मसाला और नींबू के साथ खा कर अलग ही मज़ा लेते हैं। होली के समय, बाजारों में खीरे और गन्ने की बिक्री में इजाफा हो जाता है क्योंकि लोग इन्हें खाने के साथ-साथ त्योहार के रंगों के आनंद में भी शामिल करते हैं।
खीरे के सेवन में एक रोचक बात यह है कि इसे काटने या छीलने से पहले इसके सिरों को लगभग दो मिनट तक अच्छे से रगड़ा जाता है। आम लोगों के बीच इस प्रक्रिया को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। लेकिन इस घिसाई के दौरान एक और दिलचस्प घटना होती है। जब खीरे का सिरा घिसा जाता है, तो उसमें से सफेद-सफेद झाग जैसा पदार्थ निकलता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह झाग कोई रहस्यमय या हानिकारक चीज़ नहीं है। वास्तव में, यह खीरे के अंदर मौजूद रेजिन और शर्करा युक्त रसायन का मिश्रण होता है, जो जब खीरे की सतह के साथ रगड़ा जाता है तो हवा के संपर्क में झाग जैसा दिखाई देता है। यह सफेद झाग मुख्य रूप से खीरे में मौजूद पानी, एंजाइम और कुछ प्राकृतिक रासायनिक यौगिकों के कारण बनता है। इसे खाया जा सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है।
खेती और बाजार विशेषज्ञ बताते हैं कि यह प्रक्रिया खीरे को और ताजगी देती है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे खीरे का स्वाद और कुरकुरापन भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से होली और गर्मियों के मौसम में लोग खीरे के सिरों को घिसने के बाद ही इसे काटते और खाते हैं।
खीरे की इस विशेषता ने इसे सिर्फ खाने योग्य सब्जी ही नहीं, बल्कि एक तरह का रोचक अनुभव भी बना दिया है। बच्चे और युवा इस सफेद झाग को देखकर उत्सुक होते हैं और अक्सर इसे देखने के बाद ही खीरे को चखते हैं। साथ ही, एक्सरसाइज करने वाले लोग और हेल्थ-प्रेमी इसे सलाद या डाइट में शामिल कर अपनी सेहत के लिए उपयोग करते हैं।

