क्रूड ऑयल की गिरावट 'विंडफॉल' नहीं, विकसित भारत 2047 का अवसर: गौरव वल्लभ
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को देश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इसे केवल 'विंडफॉल' मानना सही नहीं होगा। इस अवसर का उपयोग भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने देश में भयंकर आर्थिक सुनामी आने की बात कही थी।
गौरव वल्लभ ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि क्रूड ऑयल प्राइसेज के रिडक्शन को विंडफॉल मानना एक तरह से गलत है। जो क्रूड ऑयल प्राइसेज में कमी है, उससे चार काम करने चाहिए। नंबर वन: जो हमारे स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स हैं, जो क्रूड ऑयल के, जो तेल के, उनको हमें बढ़ाना भी चाहिए और जो स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स जो थोड़े कम हुए हैं, उनको वापस रीफिल करना चाहिए। सेकंड: हमें हमारी करेंसी स्टेबिलिटी, जो हमारी जो रुपया है, जो वेस्ट एशिया क्राइसिस के कारण टेम्परेरीली नीचे आया, उस करेंसी को वापस स्टेबल करके अपने फंडामेंटल लेवल पर ले जाना चाहिए। तीसरा: देश को अपनी एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने की बहुत जरूरत है, क्योंकि हमारी जो इकॉनमी है, वो डोमेस्टिक कंसम्पशन बेस्ड इकॉनमी आज भी है। पर हमें अब नेक्स्ट लेवल, नेक्स्ट जंप के लिए हमें हमारे एक्सपोर्ट्स की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ानी है। जो कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन है, उसको कम करना है और लास्ट चीज: जो क्रेडिबिलिटी, फिस्कल क्रेडिबिलिटी जो हमने जो टारगेट सेट किए हैं, भले ही वो फिस्कल डेफिसिट के हों, भले ही वो इन्फ्लेशन के हों, उन सारी टारगेट्स को, फिस्कल क्रेडिबिलिटी को हमें अचीव करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि ये जो क्रूड ऑयल प्राइसेज में जो रिडक्शन है, इसको विंडफॉल मानना एक तरह से गलत है। इस अपॉर्चुनिटी को हमें आगे आने वाले 10-12 साल की जो इकॉनमी है और जो 2047 का हमारा विकसित भारत का संकल्प है, उस संकल्प को पूरा करने के लिए इस क्रूड ऑयल प्राइसेज के रिडक्शन को यूज करना चाहिए और इन चार पिलर्स पे यूज करना चाहिए: स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स को बढ़ाना, एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस, करेंसी स्टेबलाइजेशन और हमारे जो क्रेडिबिलिटी, फिस्कल क्रेडिबिलिटी है, उसको अचीव करना चाहिए।
राहुल गांधी द्वारा देश में भयंकर आर्थिक सुनामी आने की आशंका जताए जाने पर गौरव वल्लभ ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या राहुल गांधी अर्थशास्त्री हैं? क्या राहुल गांधी के पास इस बात का कोई ठोस प्रमाण है? क्या उन्होंने रिसर्च की है? कभी वो टैक्सी मैकेनिक बन जाते हैं, कभी वो मोटर गैरेज में पहुंच जाते हैं, कभी वो रॉकेट साइंटिस्ट बन जाते हैं, कभी किसान बन जाते हैं, कभी कुछ और बन जाते हैं। आज उसी तरह वो अर्थशास्त्री बन गए। राहुल गांधी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने संसद में खड़े होकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को 'डेड इकॉनमी' बोला था। राहुल गांधी वही व्यक्ति हैं कि दुनिया भर में वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट के बाद दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम दोगुने हुए, ढाई गुना हुए, भारत में 7 से 8 फीसदी के बीच बढ़े और राहुल गांधी जी ने सवाल उठाया। राहुल गांधी वही व्यक्ति हैं कि देश का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व 680 बिलियन डॉलर आज भी बना हुआ है, पर राहुल गांधी ने फॉरेक्स रिजर्व्स पे सवाल उठाया। तो ये सप्ताह के हर दिन अलग-अलग रूप ले लेते हैं। कभी ये मैकेनिक बन जाते हैं, कभी हलवाई बन जाते हैं, कभी ये शिक्षक बन जाते हैं, कभी ये वकील बन जाते हैं, कभी किसान बन जाते हैं। आज उन्होंने ये तय किया होगा सुबह उठ के कि चलो आज अर्थशास्त्री बनें। उनके पास कोई ठोस आधार है?
उन्होंने आगे कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था रेजिलिएंट है, स्ट्रॉन्ग है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था आज भी है, आगे भी रहेगा। भारत की अर्थव्यवस्था 2047 में विकसित भारत के संकल्प को पूरा करेगी। भारत में इन्फ्लेशन अंडर कंट्रोल है। भारतीय अर्थव्यवस्था पर्यायवाची बन चुकी है, हाई ग्रोथ, लो इन्फ्लेशन का। अब हाई ग्रोथ, लो इन्फ्लेशन को अगर राहुल गांधी की शब्दावली में सुनामी कहते हैं, तो मेरा उनके बारे में कुछ नहीं कहना। हाई ग्रोथ, लो इन्फ्लेशन को ग्रोइंग इकॉनमी, इमर्जिंग इकॉनमी, मैच्योर्ड इकॉनमी, रेजिलिएंट इकॉनमी, स्ट्रॉन्ग इकॉनमी कहते हैं। मेरे अर्थशास्त्र के शिक्षक ने मुझे यही बताया है। राहुल गांधी के शिक्षकों ने उनको इसका अर्थ सुनामी बताया है, तो उनको अपने शिक्षक बदलने चाहिए।
--आईएएनएस
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