सांसद संदोष कुमार ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कहा- जंतर-मंतर खोलें और विरोध के अधिकार को बहाल करें
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता संदोष कुमार पी. ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जंतर-मंतर को खोलने और विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार को बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया है।
संदोष कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि सरकार तक पहुंचने का हर तरीका बैरिकेड्स और लाठियों से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों में वोट चोरी को लेकर भारी गुस्सा है और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कई गलत काम सामने आ चुके हैं। पत्र में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में पुष्टि की है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने झूठ बोला है।
सीपीआई नेता ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने की स्वतंत्रता है। उन्होंने लिखा, "हम कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, इस देश के छात्र और युवा हैं। हमारी मांग है कि जंतर-मंतर तक पहुंचने की अनुमति दी जाए और भारत के चुनावी लोकतंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर शांतिपूर्ण विरोध किया जाए।"
पत्र में दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। संदोष कुमार ने लिखा कि बात करने के बजाय सरकार लगातार हिरासत, गिरफ्तारी और नजरबंदी के जरिए आवाज दबा रही है। दिल्ली में अकेले 47,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और जंतर-मंतर तक पहुंचने की कोशिश करने पर बैरिकेड्स और पुलिस के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला सांसदों को भी नहीं बख्शा गया और इसे 'आपातकाल की स्थिति' बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को दिल्ली से 1,000 किलोमीटर से अधिक दूर गिरफ्तार किया जा रहा है और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि दिल्ली को सैन्य छावनी में बदलने से हम नहीं डरेंगे। हम अपनी आवाज उठाते रहेंगे।"
पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि तुरंत जंतर-मंतर और मेट्रो स्टेशन खोले जाएं, कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना बंद किया जाए और सरकार सुनना सीखे। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी है, न कि सरकार के विवेक पर दिया जाने वाला विशेषाधिकार।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी

