'कोर्ट-कचहरी नहीं, बातचीत से हो समाधान', रामभद्राचार्य विवाद पर बोले महंत सीताराम दास
अयोध्या, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्राह्मणों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर अयोध्या के साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि समाज में किसी तरह का विभेद पैदा न हो।
महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में सत्र न्यायालय में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ जो परिवाद दाखिल किया गया है, वह ब्राह्मणों की उपजातियों को लेकर दिए गए उनके वक्तव्य से संबंधित है। यदि वक्तव्य से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो जगद्गुरु रामभद्राचार्य को समाज के प्रति खेद व्यक्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा सभी के कल्याण की कामना करता है और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखना जरूरी है। महंत ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सामाजिक और धार्मिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लंबे समय से सनातन संस्कृति, राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए कार्य करते रहे हैं। महंत सीताराम दास ने कहा कि किसी वक्तव्य में चूक या त्रुटि हो जाना संभव है। ऐसी स्थिति में विवाद को कानूनी प्रक्रिया के जरिए और आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने परिवाद दाखिल करने वाले लोगों से भी अपील की कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नोटिस दिलाने या मामले को आगे बढ़ाने से समाज को कोई सकारात्मक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी बात को लेकर मतभेद है तो सभी पक्ष बैठकर बातचीत करें और आपसी सहमति से उसका समाधान निकालें। महंत ने आगे कहा कि धार्मिक और सामाजिक मामलों में विवाद बढ़ने से समाज के भीतर विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे बचना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी मुद्दे को इस तरह नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के जरिए विवाद खत्म करने की अपील की।
--आईएएनएस
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