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कोस्टा रिका की रेबेका बन सकती हैं पहली महिला यूएन महासचिव, मजबूत दावेदार के तौर पर उभरीं

कोस्टा रिका की रेबेका बन सकती हैं पहली महिला यूएन महासचिव, मजबूत दावेदार के तौर पर उभरीं
कोस्टा रिका की रेबेका बन सकती हैं पहली महिला यूएन महासचिव, मजबूत दावेदार के तौर पर उभरीं

न्यूयॉर्क, 9 अगस्त (आईएएनएस)। कोस्टा रिका की राजनयिक और पूर्व उपराष्ट्रपति रेबेका ग्रिन्सपैन अचानक ही वैश्विक पटल पर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। वो इसलिए क्योंकि रेबेका संयुक्त राष्ट्र की अगली महासचिव बनने की दौड़ में अचानक सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी हैं। अगर वो चुनी जाती हैं तो संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला महासचिव होंगी।

वर्तमान महासचिव अंतोनियो गुटेरेस का दूसरा कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक क्षेत्रीय व्यवस्था के तहत इस बार लैटिन अमेरिका से उम्मीदवार आने की उम्मीद है।

ग्रिन्सपैन वर्तमान में यूएनसीटीएएड की महासचिव हैं। उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड से मध्य अमेरिका पहुंचे थे। उनके नाना-नानी में से एक जोड़े की नाजी शासन के दौरान हत्या कर दी गई थी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों के बीच हुए शुरुआती गोपनीय ‘स्ट्रॉ पोल’ में ग्रिन्सपैन को 10 समर्थन, 4 तटस्थ और केवल 1 विरोध मिला। यह उन्हें शुरुआती दौर में सबसे मजबूत स्थिति में रखता है।

उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गुयाना की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत कैरोलिन रोड्रिग्स-बर्केट रहीं, जिन्हें 9 समर्थन, 4 तटस्थ और 2 विरोधी वोट मिले।

हालांकि, अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। द गार्डियन ने एक पश्चिमी राजनयिक के हवाले से बताया कि असली सवाल यह होगा कि विरोध वाले वोट किन स्थायी सदस्यों से आते हैं। यदि अमेरिका, रूस या चीन में से किसी ने किसी उम्मीदवार का विरोध किया, तो प्रक्रिया गतिरोध में फंस सकती है।

ग्रिन्सपैन के चयन से एक और ऐतिहासिक पहलू जुड़ा है। वह संयुक्त राष्ट्र की पहली यहूदी महासचिव भी बन सकती हैं।

गाजा युद्ध और इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका लगातार विवादों में रही है। ग्रिन्सपैन ने अपने यहूदी पारिवारिक इतिहास का उल्लेख करते हुए शांति की अहमियत पर हमेशा जोर दिया।

एक बार उन्होंने महासभा में कहा था कि उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के शरणार्थी थे और कोस्टा रिका में उन्हें सम्मान और गरिमा के साथ जीवन मिला। उनके मुताबिक, वह इस बात का उदाहरण हैं कि शांति क्या संभव बना सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी वो काफी मुखर हैं। एक्स पर लगातार वो अपने विचार साझा करती रही हैं।

उनकी बहन किशोरावस्था में इजरायल चली गई थीं, जहां उन्होंने हिब्रू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। उनके भांजे-भांजी ने इजरायल की अनिवार्य सैन्य सेवा भी पूरी की है।

ग्रिन्सपैन के नेतृत्व में यूएनसीटीएडी ने इजरायल के कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर आर्थिक प्रभाव का विस्तृत आकलन किया है।

फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से 2024 के बीच फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को अनुमानित 212.2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। रिपोर्ट ने इस नुकसान को कब्जे की नीतियों, प्रतिबंधों, बंदिशों और बार-बार होने वाले सैन्य अभियानों से जोड़ा।

ग्रिन्सपैन के अलावा गुयाना की रोड्रिग्स-बर्केट और चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट समेत कई नाम दौड़ में हैं। बाचेलेट को अमेरिका के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

चुनाव की प्रक्रिया पर बात करें तो महासचिव के चयन में पहले सुरक्षा परिषद एक उम्मीदवार की सिफारिश करती है, जिसके बाद 193 सदस्यीय महासभा से उसका समर्थन कराया जाता है। सुरक्षा परिषद में उम्मीदवार को कम से कम 9 वोट और किसी स्थायी सदस्य का वीटो न होना जरूरी है। सुरक्षा परिषद में आगे भी कई दौर की चर्चा और मतदान होंगे। नए महासचिव का चयन 2026 के अंत तक किया जाना है।

--आईएएनएस

केआर/

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