राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘सार्थक नाम अभियान’ को लेकर राज्य में विवाद खड़ा हो गया है। इस अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों के नामों को अधिक “अर्थपूर्ण और संस्कारित” बनाने की पहल पर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
विवाद बढ़ने पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यदि अभियान के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की गलती या असुविधा हुई है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के नाम रखने की पूरी स्वतंत्रता है और सरकार उनकी पसंद पर कोई जबरदस्ती नहीं करेगी।
शिक्षा विभाग के इस अभियान को लेकर कई अभिभावकों और शिक्षाविदों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बच्चों के नाम बदलने या सुझाव देने जैसी पहल व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप जैसी लग सकती है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यदि उद्देश्य केवल जागरूकता और सकारात्मक नामों को बढ़ावा देना है, तो इसे स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू किया जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ऐसी पहल से पहले व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी होनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों के नामों में सकारात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है, न कि किसी पर नाम बदलने का दबाव बनाना।
इस बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बयान के बाद मामला कुछ हद तक शांत होता नजर आ रहा है। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों की शिक्षा और अभिभावकों के अधिकारों का सम्मान करना है।
फिलहाल, ‘सार्थक नाम अभियान’ को लेकर उठे विवाद के बाद विभाग इसकी समीक्षा कर रहा है और आगे स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर किया जा सके।

