महाराष्ट्र के मुंबई से सटे विरार इलाके में हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों की चिंता और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए हैं। इस घटना में एक फल बेचने वाले शख्स पर आरोप है कि उसने अपने फलों पर कथित तौर पर गटर का गंदा पानी छिड़क दिया।
स्थानीय लोगों ने जब इस बारे में सवाल उठाए तो शख्स ने दावा किया कि वह पानी पालिका का है। लेकिन जब लोग लगातार उसे सच बताने के लिए कहते हैं कि यह गटर का पानी है, तो वह इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं दिखा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है और इंटरनेट पर लोग इसकी निंदा कर रहे हैं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि फल विक्रेता गंदे पानी को फलों पर छिड़क रहा है, जबकि आसपास खड़े लोग इसे देखकर हैरान हैं और उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इस दृश्य ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो को लेकर कई लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसे लोग उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खेल कैसे सकते हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह पूरी तरह से गैर-जिम्मेदार और अस्वास्थ्यकर व्यवहार है। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” कई लोगों ने यह भी लिखा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी खतरा है। वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक और X (पूर्व ट्विटर) पर #VirarFruits, #FoodSafety और #ViralVideo जैसे हैशटैग्स के साथ तेजी से वायरल हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों पर गंदे पानी का उपयोग करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। यह न केवल फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन है बल्कि स्थानीय कानूनों के तहत भी सख्त अपराध माना जाता है। इसके बावजूद अभी तक पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की है, जिससे लोग और ज्यादा चिंता में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बाजार और उपभोक्ताओं के विश्वास को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने प्रशासन और पालिका से मांग की है कि ऐसे मामलों की तुरंत जांच की जाए और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, विरार में फल विक्रेता का यह विवादित कदम यह दिखाता है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्वच्छता पर ध्यान न देना कितनी गंभीर समस्या बन सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों को जागरूक किया है और यह स्पष्ट किया है कि खाने-पीने की चीजों में स्वच्छता और जिम्मेदारी किसी भी हाल में समझौते योग्य नहीं है।
यह मामला समाज के लिए चेतावनी भी है कि खाने-पीने की चीजों के चयन में सावधानी बरतें और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट तुरंत करें।

