कांग्रेस ने झारखंड से प्रणव झा को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने जताई नाराजगी
रांची, 5 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए झारखंड से एआईसीसी सचिव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। गोड्डा के पूर्व सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया है।
पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने सोशल मीडिया पर जारी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और समाज को जोड़ने में लगाई है। उन्होंने कहा कि उन्हें पद नहीं मिलने का दुख नहीं है, लेकिन दशकों के समर्पण और संघर्ष की उपेक्षा किए जाने से पीड़ा हुई है। अंसारी ने इसे केवल अपनी नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं की भावना बताया जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कांग्रेस के सिपाही थे और रहेंगे।
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है। कांग्रेस ने गुरुवार देर रात प्रणव झा को इस चुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। उनकी उम्मीदवारी को लेकर झारखंड कांग्रेस के कई विधायक और नेता फिलहाल असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। आलम यह है कि उनकी उम्मीदवारी की घोषणा के 12 घंटे बाद तक पार्टी की प्रदेश इकाई और प्रदेश के किसी प्रमुख नेता ओर से अब तक स्वागत, शुभकामनाएं या बधाई संदेश तक नहीं आया है।
दूसरी ओर, प्रणव झा ने उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, झारखंड प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का धन्यवाद करते हुए कहा कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले उन जैसे व्यक्ति पर जो विश्वास व्यक्त किया गया है, उसपर वे खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के रहने वाले हैं, हालांकि उनकी प्रारंभिक शिक्षा और परवरिश बोकारो में हुई है। कांग्रेस उन्हें झारखंड से जुड़ा स्थानीय चेहरा बताने की कोशिश कर रही है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में उनके चयन को लेकर 'स्थानीय बनाम बाहरी' की बहस भी छिड़ी हुई है।
झारखंड विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 16 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए उसे झामुमो तथा अन्य इंडिया ब्लॉक सहयोगियों के समर्थन की जरूरत होगी। गठबंधन के सभी दलों का सहयोग मिला तो वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो सकते हैं।
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