कांग्रेस की सुविधा की राजनीति समय-समय पर अपने सियासी हित के लिए बदलती रहती है : सिद्धार्थ यादव
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाया जा रहा है, यह देश के खिलाफ एक गलत और अनुचित काम है और ऐसा काम है जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है। कांग्रेस पार्टी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान सिद्धार्थ यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने रास्ता न खोला होता, तो भाजपा बंगाल में नहीं आती। हालांकि चुनाव खत्म होते ही राहुल गांधी ने यू-टर्न लिया और कहा कि ये सब कुछ तो एसआईआर और चुनाव आयोग का करा-धरा है। हम लोग लगातार देख रहे हैं कि देश के अंदर, देश की चुनावी प्रक्रिया पर, और खास तौर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक झूठा प्रोपेगेंडा और झूठा नैरेटिव चलाया जा रहा है और लोकतांत्रिक प्रकिया में देशवासियों का जो विश्वास उसे कम करने का और लोकतंत्र की रीढ़ को कमजोर करने का जो प्रयास किया जा रहा है, वो हम सबके सामने है। ये प्रयास लंबे समय से चल रहा है और सुनियोजित तरीके से चल रहा है। कांग्रेस पार्टी का चुनावों में जबरदस्त यू-टर्न, कांग्रेस का राजनीतिक यू-टर्न और सुविधा की राजनीति करने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
कुछ राज्यों का जिक्र करते हुए सिद्धार्थ यादव ने कहा कि वहां कांग्रेसी नेताओं ने वोटर लिस्ट को शुद्ध करने की वकालत की लेकिन आज एसआईआर पर सवाल उठा रहे हैं। आंध्र प्रदेश में 2018 के अंदर कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्प्रेंस करते हुए कहा कि 50 लाख डुप्लीकेट वोटर हैं। नेता द्वारा मांग की गई कि नामों को जो शुचिता बनाए रखने के लिए इन नामों को हटाया जाना चाहिए। 2026 में एसआईआर हुआ और 44.28 लाख नाम हटाए गए। तेलंगाना के अंदर कांग्रेस नेता ने कहा कि 70 लाख नाम वोटर लिस्ट में गलत हैं, हटाने की मांग की गई। बाद में एसआईआर हुआ और 73.39 लाख नाम हटाए गए।
उन्होंने कहा कि जब एसआईआर की संवैधानिक प्रक्रिया के बाद देश के चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की सुचिता को बनाया गया, तो कांग्रेसी कहने लगे कि चूंकि नाम काटे जा रहे हैं, चूंकि मृत वोटरों को हटाया गया और डुप्लीकेट नाम को हटाया गया, तो इलेक्शन में गड़बड़ है। कांग्रेस का ये पैटर्न हमारे सामने है।
15 अगस्त 2018 को राजस्थान में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य में 42 लाख नाम डुप्लीकेट हैं और वो नाम हटाए जाने चाहिए। एसआईआर की प्रक्रिया ने लगभग उतने ही यानी 41.85 लाख नाम हटाए गए। केरल में कांग्रेस ने आरोप लगाकर वेबसाइट बनाई और वो हाईकोर्ट तक गए कि राज्य में 4.34 नाम डुप्लीकेट हैं। एसआईआर में लगभग 8.57 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए और उनको हटाया गया। केरल में एसआईआर हुआ और कांग्रेस पार्टी की विजय हुई, तो उन्होंने कहा कि एसआईआर तो बहुत मददगार था, बहुत अच्छा काम था। कांग्रेस ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ने झूठे नामों को वोटर लिस्ट में डाला हुआ था, उसके कारण ये गड़बड़ थी। ये सब कांग्रेस पार्टी के नेता और उनके गृह मंत्री ने बोला था।
कांग्रेस पार्टी 2018 में ये कहती थी कि अगर डुप्लीकेट नामों को नहीं हटाया गया, तो ये लोकतंत्र के साथ धोखा है। अब जब नाम हटाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस क्या कह रही है, ये हम सब देख रहे हैं। कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें अवैध प्रवासियों ने माना है कि एसआईआर से पहले वे चुनावों में वोट दिया करते थे।
उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2013 को दिल्ली में 13.58 लाख वोट हटा दिए गए थे। हम विपक्ष में थे, लेकिन हमने कभी नहीं कहा कि यह गलत है, यह वोटों की चोरी है या इस प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ है। 9 अगस्त 2013 को बिहार में 76 लाख वोटर संदिग्ध पाए गए थे। उस समय विपक्ष में से किसी ने नहीं कहा कि ये वोटर समस्या वाले हैं, प्रक्रिया में कोई कमी है या कुछ गलत हो रहा है। 27 अप्रैल 2014 को, जैसा कि हमने पीपीटी में देखा, महाराष्ट्र में बिना एसआईआर के 70.76 लाख वोटर हटा दिए गए और 74 लाख वोटर जोड़ दिए गए। किसी ने नहीं कहा कि वोटों की चोरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों के दौरान 10 बार एसआईआर किया गया। उस समय किसी ने प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया। यह समय विपक्ष के नेताओं और देश के विपक्ष के लिए अपनी जिम्मेदारी समझने का है। देश के लोकतंत्र पर सवाल उठाना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करना, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना, संवैधानिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा कम करना और जमीनी स्तर पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना और उन्हें बदनाम करना। यह विपक्ष की भूमिका नहीं है। यह देश के साथ अन्याय है।
--आईएएनएस
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