कांग्रेस के नामांकन त्रुटि से बदले राज्यसभा समीकरण, महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित: संजय पाठक
कटनी, 11 जून (आईएएनएस)। भाजपा विधायक संजय पाठक ने राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के तीनों भाजपा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व की सफलता बताया। साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के लिए उनको ही जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से तीन राज्यसभा सदस्य निर्विरोध चुने गए, जिनमें पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट शामिल हैं। उनके अनुसार यह भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक निर्णय लेने की शैली को दर्शाता है, जिसमें कई बार ऐसे नाम भी सामने आते हैं जिनकी उम्मीद स्वयं संबंधित नेताओं को भी नहीं होती।
संजय पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ही वह दल है जो अप्रत्याशित और चौंकाने वाले निर्णय लेकर राजनीतिक परिस्थितियों को अपने पक्ष में बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने महेश केवट के राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले मुकाबला कठिन माना जा रहा था और पार्टी को आवश्यक संख्या जुटाने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन परिस्थितियां अचानक बदल गईं।
उन्होंने कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने को लेकर कहा कि इससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए और भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए। उनके अनुसार यह राजनीतिक परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें दस्तावेजों की वैधता और शपथपत्र की सही जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि जैसे पौराणिक कथाओं में भगवान राम और केवट का प्रसंग आता है, वैसे ही राजनीतिक जीवन में भी कई बार अप्रत्याशित परिस्थितियां सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केवट ने भगवान राम को नदी पार कराई थी, उसी प्रकार इस बार परिस्थितियों ने महेश केवट को राज्यसभा तक पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक नेतृत्व और संगठनात्मक निर्णयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संजय पाठक ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय दूसरों पर दोषारोपण करती है। उन्होंने कहा कि यदि नामांकन पत्र में कोई जानकारी छिपाई गई है या गलत भरी गई है तो यह चुनाव प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन है। उनके अनुसार चुनावी नामांकन में सभी आपराधिक मामलों या कानूनी विवरणों का उल्लेख करना आवश्यक होता है, चाहे वह राजनीतिक आंदोलन से जुड़े मामले हों या अन्य प्रकार के।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक जीवन में कई बार धरना-प्रदर्शन या आंदोलन के दौरान एफआईआर दर्ज हो जाती है, लेकिन नामांकन में ऐसी सभी जानकारियों को स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार ऐसा नहीं करता तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस द्वारा इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट या अन्य न्यायालय में जाने की संभावना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनका कानूनी अधिकार है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के नियमों के अनुसार यदि तथ्य छिपाए गए हों तो किसी भी अदालत से राहत मिलना कठिन होता है। उन्होंने दावा किया कि अब जबकि भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं, इस मामले का राजनीतिक महत्व समाप्त हो चुका है।
विधायक ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी लगातार अपनी कमजोरियों को छुपाने और दूसरों पर आरोप लगाने की राजनीति करती रही है, जिसके कारण उसका जनाधार कम हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है, क्योंकि जनता अब विकास और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।
--आईएएनएस
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