मजबूरी ने बैठा दिया मौत के मुँह पर! बुजुर्ग मां ट्रेन के बीच जोड़ पर सफर करती दिखी, सिस्टम कहाँ सो रहा?, Video
देश में रेल यातायात सुरक्षा पर सवाल उठाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बुजुर्ग महिला को रेलवे ट्रेन के बीच के जोड़ पर बैठकर सफर करते हुए देखा जा सकता है। यह दृश्य न केवल खतरनाक है, बल्कि रेल सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक संवेदनाओं पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
वीडियो के अनुसार, बुजुर्ग महिला किसी मजबूरी या आर्थिक संकट के चलते ट्रेन के सुरक्षित डिब्बे में नहीं बैठ सकीं और उन्हें खतरनाक स्थिति में सफर करना पड़ा। ट्रेन के बीच जोड़ पर उनकी असुरक्षित स्थिति देखकर कोई भी व्यक्ति हैरान रह जाए। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए पूछा कि आखिर रेलवे प्रशासन और समाज सुरक्षा के लिए कहां हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन के जोड़ का क्षेत्र यात्री के लिए बेहद जोखिम भरा होता है। वहां की हलचल, लोहे के हिस्सों के बीच की दूरी और ट्रेन की गति के कारण किसी भी समय भयंकर दुर्घटना हो सकती है। बुजुर्ग, बच्चे या गरीब यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
रेलवे सुरक्षा पर नजर रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। भीड़भाड़ वाले डिब्बों, महंगे टिकट या ट्रेन के सामान्य डिब्बों में सीट न मिलने के कारण लोग मजबूरी में खतरनाक स्थानों पर सफर करने को मजबूर हो जाते हैं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने रेलवे प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। कई यूजर्स ने कहा कि यदि बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाएगी, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ती जाएगी।
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि ट्रेन में बुजुर्ग और असहाय यात्रियों के लिए अलग से सुरक्षित व्यवस्था, गार्ड की पैनी निगरानी और टिकट की किफायती दरें सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा यात्रियों को जागरूक करना भी जरूरी है कि खतरनाक स्थानों पर सफर करना उनकी जान के लिए खतरा है।
इस वायरल वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि केवल यात्री की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि सही समय पर सुरक्षा उपाय और निगरानी की जाए, तो ऐसी जोखिमपूर्ण परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
बुजुर्ग महिला की यह स्थिति समाज के लिए चेतावनी है कि गरीबी और असमानता कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। मजबूरी ने उन्हें मौत के मुंह के करीब ला दिया, और सवाल यही है कि आखिर सिस्टम कहाँ सो रहा है।
यह मामला न केवल रेलवे सुरक्षा पर प्रश्न उठाता है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और कमजोर वर्ग के लिए संरचनात्मक व्यवस्थाओं की कमी को भी उजागर करता है।

