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कलर ब्लाइंडनेस बनी चुनौती, शहडोल के शुभम तिवारी को पीएमएफएमई योजना से मिला सहारा, 'ग्रेनॉक्सी' बना ग्लोबल ब्रांड

शहडोल, 3 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के शहडोल के युवा उद्यमी शुभम तिवारी ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर हौसले बुलंद हों और सही दिशा मिल जाए, तो असफलता भी सफलता की नई कहानी लिख सकती है। सरकारी नौकरी में असफल रहने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपनों को नया रास्ता दिया और आज 'ग्रेनॉक्सी' नाम से एक सफल मिलेट आधारित उद्योग खड़ा किया है, जो न केवल देश बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।
कलर ब्लाइंडनेस बनी चुनौती, शहडोल के शुभम तिवारी को पीएमएफएमई योजना से मिला सहारा, 'ग्रेनॉक्सी' बना ग्लोबल ब्रांड

शहडोल, 3 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के शहडोल के युवा उद्यमी शुभम तिवारी ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर हौसले बुलंद हों और सही दिशा मिल जाए, तो असफलता भी सफलता की नई कहानी लिख सकती है। सरकारी नौकरी में असफल रहने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपनों को नया रास्ता दिया और आज 'ग्रेनॉक्सी' नाम से एक सफल मिलेट आधारित उद्योग खड़ा किया है, जो न केवल देश बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है।

शुभम तिवारी (जो ग्रेनॉक्सी यूनिट शहडोल, उज्जैन और जबलपुर के संस्थापक एवं संचालक हैं) ने कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाजों से रोजमर्रा में उपयोग होने वाले उत्पाद जैसे पास्ता, कुकीज़ और अन्य हेल्दी फूड तैयार कर उन्हें एक बेहतर स्वास्थ्य विकल्प के रूप में पेश किया है। साथ ही उन्होंने इन यूनिट्स के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।

आईएएनएस से बातचीत में शुभम ने बताया कि वर्ष 2016 में माइनिंग इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने एसईसीएल (कोल इंडिया) में एक साल की ट्रेनिंग ली थी, लेकिन मेडिकल जांच में कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह उनके जीवन का बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे ही अपनी ताकत बना लिया।

शुभम ने जीरो इन्वेस्टमेंट के साथ 'स्किलेंस एकेडमी' नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू किया, जहां वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने लगे। महज 8 महीनों में उनके साथ 1 लाख से अधिक छात्र जुड़ गए, जो बाद में लाखों तक पहुंच गए। उनके चैनल से जुड़े करीब 164 छात्रों ने विभिन्न सरकारी नौकरियां हासिल कीं। यही उनके लिए शुरुआती आय का माध्यम बना। इसके अलावा उन्होंने कई किताबें भी लिखीं, जो अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

इस दौरान उन्हें केरल के तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मिलने का मौका मिला, वहीं अमेरिका के एक बड़े बिजनेसमैन से भी मुलाकात हुई, जिससे उन्हें शुरुआती वित्तीय सहयोग मिला।

कोविड के बाद जब लोगों का रुझान हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ा, तब शुभम ने महसूस किया कि शहडोल जैसे आदिवासी क्षेत्र में कोदो-कुटकी जैसे मिलेट्स की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर मार्केट रिसर्च की और शहडोल में 1 टन प्रति घंटे की क्षमता वाली मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की।

इसके बाद उज्जैन में बेकरी यूनिट शुरू की गई, जहां कुकीज़ और क्रैकर्स बनाए जाते हैं, जबकि जबलपुर में 'सुपरफूड कैफे' की शुरुआत की गई, जहां मिलेट आधारित पिज्जा, सैंडविच और अन्य हेल्दी खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं।

शुभम ने बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ व्यवसाय करना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र का विकास करना था। शहडोल में रोजगार का मुख्य स्रोत कोल माइंस है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। ऐसे में उन्होंने एक ऐसा मॉडल विकसित किया, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और लोगों को स्थायी रोजगार दे सके।

हालांकि इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फाइनेंस जुटाना और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक से लोन लेने में उन्हें करीब डेढ़ साल का समय लगा। इसी दौरान उन्हें केंद्र सरकार की पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन) योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत उन्हें लगभग 50 लाख रुपए का बैंक लोन मिला, जिसमें 10 लाख रुपए की सब्सिडी शामिल थी। इस सहयोग से उन्होंने अन्य संसाधन जुटाकर करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से यूनिट स्थापित की।

शुभम ने बताया कि उन्होंने जर्मनी से कस्टमाइज मशीन मंगवाई और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया। आज उनकी यूनिट में मुनगा फ्लेवर पास्ता, चिया सीड्स कुकीज़ और महुआ फ्लेवर चॉकलेट जैसे इनोवेटिव उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जो रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट कैटेगरी में आते हैं।

उनके उत्पाद श्रीलंका, यूएई, गल्फ देशों, ईरान और अमेरिका तक पहुंच चुके हैं, और अब वे वॉलमार्ट के साथ यूके और कनाडा जैसे बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें 42 टन का प्री-ऑर्डर भी मिला था।

भोपाल में आयोजित एक समिट के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला। इस मुलाकात में उन्होंने शहडोल में मिलेट्स की संभावनाओं पर चर्चा की, जिस पर प्रधानमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए सहयोग का आश्वासन दिया।

संस्था की निदेशक साक्षी तिवारी ने बताया कि वे मिलेट्स की गुणवत्ता से जुड़े कार्यों को देखती हैं और सरकार की योजनाओं से संस्था को आगे बढ़ने में काफी मदद मिली है।

शुभम के पिता संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण बेटे की नौकरी नहीं लग पाई, लेकिन उसने खुद का काम शुरू कर आज बड़ी सफलता हासिल की। उनकी मां ऊषा तिवारी ने भी केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग को अहम बताया।

वहीं, यूनिट में काम करने वाली दीपमाला साकेत, दुर्गा देवी चौधरी और महक चौधरी ने बताया कि यहां रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर पा रही हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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