सीएम धामी ने मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर ठीक नहीं किया : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
बरेली, 31 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले का ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विरोध किया है।
लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि यह बहुत दुखद बात है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर दिया है और 250 मदरसों पर ताला लगा दिया है। साथ ही, उन मदरसों का दर्जा समाप्त करके उन्हें वापस स्कूल का दर्जा दिया जा रहा है। वे कह रहे हैं कि मदरसों से जिहाद की तालीम दी जाती थी और समाज के खिलाफ शिक्षा दी जाती थी। यह अफसोस की बात है। इससे उनका असली चेहरा भारत के सामने आया है। दुनिया ने देख लिया है कि मुसलमानों के खिलाफ साजिश की गई है। इससे पहले कई मदरसों पर बुलडोजर चलाया गया है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि मदरसों का इतिहास पढ़ें, जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया। वो मदरसों को बदनाम कर रहे हैं, जिन मदरसों ने सरकार से एक भी रुपया नहीं लिया। वे कौम के चंदा से संचालित होते हैं और छोटे बच्चों को उर्दू-फारसी की तालीम दी जाती है। उससे सरकार को क्या एतराज है।
दूसरी ओर, सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के भीतर व्याप्त विभाजनकारी मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए, हमने राज्य मदरसा बोर्ड को खत्म करने का फैसला किया है। हमने आदेश दिया है कि 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी, इस मानकीकृत पाठ्यक्रम को इन संस्थानों में भी लागू किया जाएगा। हम नहीं चाहते हैं कि राज्य के अंदर जिहादी सोच पनपे। मदरसे ‘ज्ञान के मंदिर’ बनें, कट्टरता के केंद्र नहीं।
भाजपा उत्तराखंड की ओर से कहा गया कि सीएम धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक युगांतरकारी सुधार की नींव रखी है। 1 जुलाई 2026 तक मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय न केवल प्रशासनिक साहस का परिचायक है, बल्कि यह हर बच्चे को समान अवसर देने की धामी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। मुख्यमंत्री का यह विजन स्पष्ट है शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मदरसा बोर्ड के समापन के साथ ही, हजारों छात्रों को मुख्यधारा की आधुनिक और समावेशी शिक्षा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह कदम धार्मिक कट्टरता की दीवारों को तोड़कर वैज्ञानिक और आधुनिक सोच वाले नए उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में एक 'निर्णायक प्रहार' है।
--आईएएनएस
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