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8वीं के छात्र की सूझबूझ से बचा परिवार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम नाकाम

8वीं के छात्र की सूझबूझ से बचा परिवार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम नाकाम

उत्तर प्रदेश के बरेली से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 8वीं कक्षा के छात्र की समझदारी ने पूरे परिवार को साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया। यह मामला ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर परिवार को डराने की कोशिश की।

जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने फोन कॉल के जरिए परिवार से संपर्क किया और खुद को सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्होंने परिवार को किसी कथित मामले में फंसाने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की और पैसे ऐंठने का प्रयास किया।

इसी दौरान घर में मौजूद 8वीं कक्षा के छात्र को बातचीत पर शक हुआ। उसने तुरंत स्थिति को समझा और अपने माता-पिता को सावधान कर दिया। समय रहते सतर्क होने की वजह से परिवार ने किसी भी तरह की आर्थिक लेन-देन या निजी जानकारी साझा नहीं की, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे स्कैम में ठग लोगों को डराकर तुरंत फैसला लेने पर मजबूर करते हैं, जिससे वे गलती कर बैठते हैं।

साइबर पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें और ऐसी किसी भी स्थिति में स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

कुल मिलाकर, इस मामले ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता और सतर्कता किसी भी उम्र में बड़ी ठगी को रोक सकती है, और एक छोटी सी समझदारी पूरे परिवार को सुरक्षित रख सकती है।

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