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सीआईएमएल बैठक में एआई, डिजिटलीकरण और मापन मानकों पर चर्चा, नई दिल्ली में जुटे वैश्विक विशेषज्ञ

सीआईएमएल बैठक में एआई, डिजिटलीकरण और मापन मानकों पर चर्चा, नई दिल्ली में जुटे वैश्विक विशेषज्ञ
सीआईएमएल बैठक में एआई, डिजिटलीकरण और मापन मानकों पर चर्चा, नई दिल्ली में जुटे वैश्विक विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत पहली बार विधिक माप विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय समिति (सीआईएमएल) की 61वीं बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक 26 से 28 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित हो रही है। इसमें मापन मानकों, उपभोक्ता संरक्षण और निष्पक्ष व्यापार में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनियाभर से प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ आज 'विधिक माप विज्ञान में विकास' विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ हुआ, जिसके बाद सीआईएमएल की 61वीं बैठक का पहला सत्र आयोजित किया गया। सीआईएमएल के अध्यक्ष डॉ. बॉब जोसेफ मैथ्यू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं की रक्षा करने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में विधिक माप विज्ञान के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया।

स्वीडन की सीआईएमएल की प्रथम उपाध्यक्ष रेनी हैन्सन ने डिजिटलीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलती बाजार आवश्यकताओं से निपटने में विधिक माप विज्ञान की विकसित होती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामंजस्यपूर्ण मापन मानकों और सदस्य देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

विधिक माप विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो के निदेशक एंथनी डोनेलन ने अंतरराष्ट्रीय विधिक मापिकी संगठन (ओआईएमएल) प्रमाणन प्रणाली के माध्यम से परीक्षण परिणामों की पारस्परिक स्वीकृति को सुगम बनाने और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मशीन-पठनीय मानकों, एआई और डिजिटल परिवर्तन से संबंधित उभरती पहलों के बारे में भी बताया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि भारत के लिए यह गर्व का विषय है कि वह पहली बार सीआईएमएल बैठक की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सटीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्यपूर्ण मापन, निष्पक्ष व्यापार, उपभोक्ताओं का विश्वास, औद्योगिक नवाचार और आर्थिक विकास के मूल आधार हैं।

उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण के साथ-साथ कारोबार में सुगमता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वर्ष 2023 और 2026 के जन विश्वास सुधारों का उल्लेख किया। इन सुधारों के तहत निर्दिष्ट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और आनुपातिक नियामक ढांचे को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं।

खरे ने बताया कि सत्यापन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत परीक्षण केंद्रों यानी जीएटीसी का विस्तार किया गया है और विधिक माप विज्ञान के क्षेत्र में एकीकृत डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए ई-माप राष्ट्रीय पोर्टल विकसित किया गया है। उन्होंने ओआईएमएल-सीएस के अंतर्गत भारत को जारीकर्ता प्राधिकरण के रूप में मान्यता मिलने का भी उल्लेख किया, जो भारतीय निर्माताओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा।

उन्होंने राष्ट्रीय समय प्रसार परियोजना 'एक राष्ट्र, एक समय' पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य पूरे देश में सटीक और विश्वसनीय भारतीय मानक समय प्रदान करना है। इससे बैंकिंग, दूरसंचार, 5जी नेटवर्क, नौवहन और विद्युत प्रणालियों में समय तालमेल को मजबूती मिलेगी।

सेमिनार के दौरान उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक आशुतोष अग्रवाल ने 'भारत में विधिक माप विज्ञान का विकास और सुधार' विषय पर प्रस्तुति दी। इसमें अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ई-माप पोर्टल, पैकेज्ड वस्तुओं का विनियमन और रांची स्थित भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान जैसी पहलों पर प्रकाश डाला गया।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग उपकरणों, डिजिटल परिवर्तन, ओआईएमएल की स्मार्ट सिफारिशें पहल और मापन प्रणालियों में एआई के उपयोग पर चर्चा की। ओआईएमएल की रणनीति कार्यशाला 27 अक्टूबर को होगी, जिसके बाद 28 अक्टूबर को प्रतिनिधि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का दौरा करेंगे।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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