चुनाव के वक्त भाजपा को याद आते हैं यूसीसी और घुसपैठ के मुद्दे: राजेंद्र पाल गौतम
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने से जुड़े अमित शाह के बयान, घुसपैठ के मुद्दे, पेपर लीक विरोधी आंदोलनों के दौरान हुई कार्रवाई, भारत-चीन सीमा पर चीनी सेना की तैनाती में कमी, महिला एशिया कप में भारतीय टीम की जीत और ट्रॉफी विवाद के साथ-साथ हाल में हुए ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर टिप्पणी की।
अमित शाह के 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने संबंधी बयान पर राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा के नेताओं को यूसीसी, घुसपैठिए और हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दे याद आने लगते हैं। सरकार बयान तो बहुत देती है, लेकिन जमीन पर काम कम दिखाई देता है। गृह मंत्री से पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलनों और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास पत्थरों से भरे वाहन किसने खड़े किए थे। पुलिस और छात्रों के खिलाफ हिंसा करने वाले लोग कौन थे। दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए सरकार को इन घटनाओं के बारे में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में संविधान और कानून है तथा सभी को उसी के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने अमित शाह से गृह मंत्री के पद की जिम्मेदारी के अनुरूप बयान देने और कार्रवाई करने की अपील की।
घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने सवाल किया कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार ने अब तक कितने घुसपैठियों को पकड़ा और कितने लोगों को वापस भेजा है। केवल बयान देने के बजाय सरकार को ठोस कार्रवाई और आंकड़े सामने रखने चाहिए। विदेश नीति को लेकर केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चीन लगातार भारत के सामने चुनौती खड़ी करता है, लेकिन सरकार इस पर पर्याप्त जवाब नहीं देती।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में भारत-चीन सीमा पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में कमी और दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के संकेत मिलने से जुड़े सवाल पर गौतम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सबसे पहले सरकार को यह बताना चाहिए कि सीमा से जुड़े जिन क्षेत्रों पर चीन के कब्जे की सूचनाएं सामने आती रही हैं, क्या वहां से चीनी सेना पीछे हट चुकी है। केवल बयानबाजी से सीमा विवाद का समाधान नहीं होगा। उन्होंने रक्षा मंत्री के बयानों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
भारतीय महिला टीम की एशिया कप जीत पर राजेंद्र पाल गौतम ने खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं बेहद सक्षम हैं और उन्हें अवसर मिलने पर वे अपनी प्रतिभा साबित करती हैं। गौतम ने इसी संदर्भ में महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण कानून के तहत कम से कम 33 प्रतिशत आरक्षण को आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में लागू किया जाए। महिलाओं को उनका अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
महिला एशिया कप की ट्रॉफी से जुड़े विवाद पर गौतम ने कहा कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है, इसलिए वह इस पर निश्चित टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि उन्होंने कहा कि खेल में खेल भावना सबसे महत्वपूर्ण है। खिलाड़ी, छात्र, अधिकारी या नेता, किसी को भी जाति और धर्म के आधार पर विभाजित नहीं होना चाहिए। सभी को इन विभाजनों से ऊपर उठकर खेल और समाज में समानता की भावना को मजबूत करना चाहिए।
ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि भारत के पास चीन के साथ संवाद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। सम्मेलन के दौरान भारत को सीमा विवाद और सैनिकों के बीच होने वाले तनाव जैसे मुद्दों पर चीन के साथ बातचीत करनी चाहिए थी। दोनों देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। गौतम ने दावा किया कि भारत-चीन सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित बातचीत नहीं हुई, जिसे उन्होंने निराशाजनक बताया।
उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स जैसा अंतरराष्ट्रीय मंच केवल वैश्विक मुद्दों पर चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को उठाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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