Samachar Nama
×

'चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं', एसआईआर विवाद पर रामदास अठावले

'चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं', एसआईआर विवाद पर रामदास अठावले
'चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं', एसआईआर विवाद पर रामदास अठावले

जयपुर, 26 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग से जुड़ा विषय है और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से इस्तीफे की मांग को राजनीतिक मुद्दा बताया और कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखना चाहिए।

रामदास अठावले ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना था। जिन लोगों को मतदान का अधिकार है, उनका नाम सूची में रहना चाहिए और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जो नाम जोड़े गए हैं या जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम हटाए जाने चाहिए। अगर एक ही पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में लोगों के नाम दर्ज हैं तो उनकी जांच भी जरुरी थी। एसआईआर का फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिया था। बाद में दोनों चुनाव आयुक्तों के विरोध की बात सामने आई, लेकिन अंततः तीनों ने मिलकर एसआईआर की घोषणा की।

अठावले ने आगे कहा कि ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर को लेकर अपना पक्ष रखा है और सरकार का इस प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। संविधान के अनुसार चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। सरकार और चुनाव आयोग के बीच इस तरह का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कहा कि यह राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

सीजेपी की ओर से ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने के बाद आंदोलन की चेतावनी पर भी अठावले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीजेपी ने इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन किया था और उस समय उन्हें देशभर से समर्थन मिला था। उस आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया गया और सीजेपी की मांगें पूरी की गईं। अठावले ने सवाल उठाया कि क्या सीजेपी केवल इस्तीफे की मांग करने के लिए बनी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर मुद्दे पर इस्तीफा मांगना ही उद्देश्य है तो संगठन का नाम 'इस्तीफा जनता पार्टी' होना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके

Share this story