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चिन्न जीयर स्वामी का कालाकुआं वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर में आगमन, शांति और आध्यात्मिकता का दिया संदेश

चिन्न जीयर स्वामी का कालाकुआं वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर में आगमन, शांति और आध्यात्मिकता का दिया संदेश

शहर के कालाकुआं स्थित वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम मंदिर ट्रस्ट में सोमवार को स्टैचू ऑफ इक्वलिटी, हैदराबाद के संस्थापक चिन्न जीयर स्वामी का आगमन हुआ। उनके आगमन पर मंदिर परिसर में भक्तों में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वामी जी के दर्शन और उनके प्रवचन सुनने के लिए एकत्रित हुए।

इस अवसर पर चिन्न जीयर स्वामी ने भक्तों को संबोधित करते हुए विश्व शांति, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया विभिन्न संघर्षों और तनावों से गुजर रही है, कई देश एक-दूसरे के प्रति वैमनस्य और युद्ध की स्थिति में हैं, ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के कारण शांति और संतुलन का प्रतीक बना हुआ है।

स्वामी जी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति हमेशा से “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत पर आधारित रही है, जिसने पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की सीख दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया में अशांति और अस्थिरता बढ़ रही है, तब भारत की आध्यात्मिक विरासत मानवता को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण से पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के विचारों को गंभीरता से सुना और उनके संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चिन्न जीयर स्वामी का स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मकता और एकता का संदेश फैलता है।

स्वामी जी ने अपने संबोधन में युवाओं को भी विशेष रूप से प्रेरित किया और उन्हें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को जीवन में अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज की नींव अच्छे संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना पर टिकी होती है।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के साथ भजन-कीर्तन में भाग लिया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा आयोजन शांति, भक्ति और आध्यात्मिकता के वातावरण में संपन्न हुआ।

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