चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे: PM Modi ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से की चर्चा, वैश्विक प्रसार पर की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को दुनिया भर में पहुंचाने के साथ स्वामी चिन्मयानंद की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाना है।इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम के जरिए उनसे बातचीत का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुरुदेव के साथ संवाद का अनुभव उन्हें पुरानी यादों में ले गया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात को भी याद किया।
स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बातचीत, पुरानी यादें हुईं ताजा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखकर और उससे बातचीत करके उन्हें ऐसा महसूस हुआ, मानो वह 33 साल पीछे लौट गए हों। इस अनुभव ने उन्हें गुरुदेव के साथ हुई बातचीत, उनके स्नेह और आशीर्वाद की याद दिला दी।
प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के सदस्यों का इस विशेष अनुभव के लिए आभार जताया। उन्होंने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी पिछली मुलाकात में युवाओं की शक्ति और उसके माध्यम से एक मजबूत, सक्षम भारत के निर्माण पर गंभीर चर्चा हुई थी।मोदी ने कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद उनके जीवन में हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने यह भी याद किया कि स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के कुछ साल बाद उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर मिला।
‘भारत हमारी संस्कृति का जन्मस्थान और अस्तित्व का आधार’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और देश की सभ्यतागत विरासत के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है।उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराएं आज भी मानवता को दिशा दे सकती हैं। भगवद्गीता और वेदांत के संदेशों को आधुनिक जीवन से जोड़कर लोगों तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत की आध्यात्मिक विरासत का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और मानवता के कल्याण का रास्ता भी दिखाती है।
1951 में हुई थी चिन्मय मिशन की स्थापना
चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। इसका प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता की शिक्षाओं को सरल और व्यावहारिक तरीके से आम लोगों तक पहुंचाना था।बीते 75 वर्षों में मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, युवाओं के व्यक्तित्व विकास और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में काम का विस्तार किया है। मिशन की गतिविधियां भारत के साथ-साथ कई अन्य देशों में भी संचालित होती हैं।इस वर्ष आयोजित अमृत महोत्सव का मकसद मिशन की उपलब्धियों को याद करना, स्वामी चिन्मयानंद के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और भविष्य में आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार को मजबूत करना है।
23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा वैश्विक सम्मेलन
चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं, आध्यात्मिक साधकों और मिशन से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।कार्यक्रम में आध्यात्मिक चर्चा, वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्वामी चिन्मयानंद के जीवन एवं शिक्षाओं पर आधारित प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य अलग-अलग देशों में रहने वाले चिन्मय मिशन के सदस्यों को एक मंच पर लाना और ज्ञान, सेवा तथा आध्यात्मिक विकास की भावना को मजबूत करना है।
भगवद्गीता के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने की पहल
चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे साल कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें भगवद्गीता के संदेश को विभिन्न भाषाओं और माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुंचाने की पहल भी शामिल रही।एक प्रमुख कार्यक्रम ‘चिन्मय गीता समर्पणम’ के तहत दुनिया भर में एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया। वहीं, ‘गीता पंचामृत’ पहल के जरिए गीता के पांच चुने हुए श्लोकों की शिक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।इसके अलावा, चिन्मय युवा केंद्र के 15 युवा सदस्यों ने ‘चिन्मय अमृत यात्रा’ के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा कर मिशन के संदेश को फैलाया। इस यात्रा में 40 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय किए जाने की जानकारी दी गई।
युवाओं को सशक्त बनाने पर रहा जोर
स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं में युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। उनका मानना था कि ज्ञान, अनुशासन और सही दिशा के जरिए युवा न केवल अपना जीवन बेहतर बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने भी गुरुदेव के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए युवाओं की शक्ति से एक मजबूत और सक्षम भारत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन केवल एक वर्षगांठ समारोह नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और नई पीढ़ी के बीच संबंध मजबूत करने का अवसर भी है। स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को आधुनिक तकनीक और नए माध्यमों से दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

