समाजशास्त्रियों का मानना है कि वे बच्चे कभी नहीं बिगड़ते जो अपने माता-पिता के संघर्ष और मेहनत को नज़दीक से देखते हैं। ऐसे बच्चों में जीवन के प्रति अनुशासन, मेहनत और जिम्मेदारी की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
जब बच्चे अपने परिवार की कठिनाइयों और संघर्षों को समझते हैं, तो वे केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बनते, बल्कि वे अपने परिवार और समाज के प्रति भी जिम्मेदार बनते हैं। यह अनुभव उन्हें चुनौतियों का सामना करने, निर्णय लेने और जीवन में सही मार्ग चुनने में मदद करता है।
माता-पिता की मेहनत और संघर्ष बच्चों के चरित्र निर्माण में सबसे बड़ा शिक्षक साबित होता है। यही कारण है कि ऐसे बच्चे सामाजिक और व्यक्तिगत दोनों जीवन में सफल और संतुलित होते हैं।

