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बच्चों ने जाना जवाई बांध का इतिहास, जल संरक्षण और प्रकृति के महत्व से हुए रूबरू

जवाई बांध राजस्थान के पाली जिले में स्थित प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में से एक है। यह बांध जवाई नदी पर बना है और पश्चिमी राजस्थान में जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।  जवाई बांध की प्रमुख जानकारी स्थान: पाली जिला, राजस्थान नदी: जवाई नदी निर्माण: 1940 के दशक में शुरू होकर 1957 के आसपास पूरा हुआ निर्माण का उद्देश्य: सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र: पाली और आसपास के क्षेत्र विशेष पहचान: जवाई के आसपास का क्षेत्र तेंदुओं और मगरमच्छों के प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध है। जवाई बांध का इतिहास जवाई बांध का निर्माण तत्कालीन जोधपुर रियासत के समय कराया गया था। इसका उद्देश्य पाली और आसपास के सूखे क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराना तथा कृषि को सहारा देना था। बांध बनने के बाद इस क्षेत्र की जल व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया।  जवाई नदी लूणी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। मानसून के दौरान आसपास के जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर बांध में पानी की आवक बढ़ती है।  पाली की जीवनरेखा जवाई बांध को पाली जिले की जीवनरेखा कहा जाता है। बांध में पर्याप्त पानी होने से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसके जलस्तर पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की नजर बनी रहती है, खासकर मानसून के दौरान।  तेंदुओं के लिए भी प्रसिद्ध जवाई बांध आज केवल जल परियोजना नहीं है। इसके आसपास की जवाई पहाड़ियां और चट्टानी क्षेत्र तेंदुओं के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां तेंदुओं को खुले प्राकृतिक वातावरण में देखा जा सकता है। इसी वजह से जवाई क्षेत्र राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव और पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।  मानसून में जब जवाई बांध लबालब होता है, तब यहां का प्राकृतिक नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियां, जलाशय और वन्यजीव इस क्षेत्र को राजस्थान के खास पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।

जवाई बांध राजस्थान के पाली जिले में स्थित प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में से एक है। यह बांध जवाई नदी पर बना है और पश्चिमी राजस्थान में जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

जवाई बांध की प्रमुख जानकारी

  • स्थान: पाली जिला, राजस्थान
  • नदी: जवाई नदी
  • निर्माण: 1940 के दशक में शुरू होकर 1957 के आसपास पूरा हुआ
  • निर्माण का उद्देश्य: सिंचाई और पेयजल आपूर्ति
  • प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र: पाली और आसपास के क्षेत्र
  • विशेष पहचान: जवाई के आसपास का क्षेत्र तेंदुओं और मगरमच्छों के प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध है।

जवाई बांध का इतिहास

जवाई बांध का निर्माण तत्कालीन जोधपुर रियासत के समय कराया गया था। इसका उद्देश्य पाली और आसपास के सूखे क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराना तथा कृषि को सहारा देना था। बांध बनने के बाद इस क्षेत्र की जल व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया।

जवाई नदी लूणी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। मानसून के दौरान आसपास के जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर बांध में पानी की आवक बढ़ती है।

पाली की जीवनरेखा

जवाई बांध को पाली जिले की जीवनरेखा कहा जाता है। बांध में पर्याप्त पानी होने से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसके जलस्तर पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की नजर बनी रहती है, खासकर मानसून के दौरान।

तेंदुओं के लिए भी प्रसिद्ध

जवाई बांध आज केवल जल परियोजना नहीं है। इसके आसपास की जवाई पहाड़ियां और चट्टानी क्षेत्र तेंदुओं के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां तेंदुओं को खुले प्राकृतिक वातावरण में देखा जा सकता है। इसी वजह से जवाई क्षेत्र राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव और पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

मानसून में जब जवाई बांध लबालब होता है, तब यहां का प्राकृतिक नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियां, जलाशय और वन्यजीव इस क्षेत्र को राजस्थान के खास पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।

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