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छत्‍तीसगढ़: मात्र 20 रुपए में लाखों का सुरक्षा कवच, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से राहत महसूस कर रहे बालोद के लाभार्थी

बालोद,10 मई (आईएएनएस)। देशभर में करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बनी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओस से इस योजना की शुरुआत की गई थी।
छत्‍तीसगढ़: मात्र 20 रुपए में लाखों का सुरक्षा कवच, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से राहत महसूस कर रहे बालोद के लाभार्थी

बालोद,10 मई (आईएएनएस)। देशभर में करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बनी प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओस से इस योजना की शुरुआत की गई थी।

छत्तीसगढ़ के बालोद में भी हितग्राहियों ने इस योजना को गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत बताते हुए कहा कि मुश्किल समय में सरकार की यह पहल उनके लिए मददगार साबित हुई है।

इस योजना ने दुर्घटना और आकस्मिक मौत जैसी परिस्थितियों में हजारों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया है।

बालोद की मंजू साहू ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना खाताधारकों के लिए बेहद लाभकारी योजना है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में दिव्‍यांग होने पर एक लाख और मृत्यु होने पर दो लाख रुपए तक की सहायता मिलती है, जिससे गरीब परिवारों को संकट के समय आर्थिक सहारा मिलता है।

वहीं, ईश्वर कुमार, ओमप्रकाश और लाल जी साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के जरिए करोड़ों लोगों को बीमा सुरक्षा का सीधा लाभ मिल रहा है। लोगों का कहना है कि पहले किसी दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार पूरी तरह टूट जाता था, लेकिन अब इन योजनाओं से आर्थिक मदद मिलने से परिवारों को संभलने में राहत मिलती है।

हितग्राहियों ने कहा कि यदि ये योजनाएं नहीं होतीं तो गरीब परिवारों की स्थिति और अधिक कठिन हो सकती थी। साथ ही लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए दूसरों को भी ऐसी योजनाओं से जुड़ने की सलाह दी।

ओम प्रकाश साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना बहुत लाभकारी सिद्ध हो रही है। इसके तहत मात्र 20 रुपए प्रतिवर्ष देना होता है। इसके लिए पीएम मोदी को बहुत धन्‍यवाद व्‍यक्‍त करना चाहता हूं।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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