छत्तीसगढ़: धमतरी में मिलेट महोत्सव, डॉ. खादर वली ने बताया मोटे अनाज का फायदा
धमतरी, 5 जनवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को मिलेट महोत्सव का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मिलेट मैन ऑफ इंडिया पद्मश्री डॉ. खादर वली ने शिरकत की। उनके दौरे को लेकर जिले के किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला।
डॉ. खादर वली ने किसानों को ऐसा संदेश दिया, जो न केवल उनकी आमदनी बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है, बल्कि समाज को कई गंभीर बीमारियों से भी मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस अवसर पर धमतरी कलेक्टर कार्यालय में किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पारंपरिक खेती और देसी मिलेट्स यानी मोटे अनाजों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान पद्मश्री डॉ. खादर वली ने कहा कि आज के समय में लोग अत्यधिक मात्रा में गेहूं और चावल का सेवन कर रहे हैं, जो कई तरह की बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है। यदि भोजन में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और कुटकी जैसे प्राचीन मिलेट्स को शामिल किया जाए, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलेगा और बार-बार डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डॉ. वली ने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक और स्थानीय फसलों की ओर लौटें, क्योंकि यही फसलें न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि कम लागत में अधिक मुनाफा भी दे सकती हैं।
बैठक के साथ-साथ कलेक्टर परिसर में एक भव्य मिलेट प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें कोदो और कुटकी से बनने वाले विभिन्न पौष्टिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को यह समझाया गया कि मिलेट्स से केवल कच्चा अनाज ही नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर बाजार में अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। जिलेभर से बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने इस पहल की सराहना की और मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
डॉ. खादर वली ने कहा कि गेहूं और चावल पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर ज्वार, बाजरा और रागी जैसे सुपरफूड को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य और खेती दोनों के लिए एक स्थायी समाधान बताया। प्रशासन की इस पहल से न केवल लोगों के खान-पान में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
माना जा रहा है कि डॉ. खादर वली का यह दौरा धमतरी जिले में स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत करेगा।
किसान लालराम चंद्राकर ने आईएएनएस से बातचीत में जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा आयोजित मिलेट कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि पद्मश्री डॉ. खादर वली द्वारा दी गई जानकारी बेहद उपयोगी है। लालराम ने बताया कि पहले के समय में मोटे अनाजों का नियमित रूप से उपयोग किया जाता था, जिससे लोग स्वस्थ रहते थे और बीमारियां दूर रहती थीं। यही मोटे अनाज लोगों का प्रमुख आहार हुआ करता था।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में यदि हम अपने खान-पान में फिर से मोटे अनाजों को शामिल करें, तो निश्चित तौर पर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। एक किसान के रूप में उन्होंने बताया कि वे स्वयं अपने खेत में मोटे अनाज का उत्पादन करते हैं और अब इस जानकारी के आधार पर अन्य किसानों को भी मोटे अनाज की खेती और इसके उपयोग के लिए जागरूक करेंगे।
--आईएएनएस
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