छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान आरएसएस-भाजपा के लोगों ने की हिंसा: वी शिवदासन
नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) के सांसद वी शिवदासन ने स्वतंत्र भारद्वाज पर पुलिस की कार्रवाई, राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति, हल्द्वानी में कथित 'शुद्धिकरण' विवाद और झारखंड में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन मामलों को लेकर केंद्र सरकार, भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए वी शिवदासन ने आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान आरएसएस और भाजपा से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों ने छात्रों के खिलाफ हिंसक तरीके अपनाए और उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला। यह देश की कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारद्वाज ने सार्वजनिक रूप से कुछ घटनाओं में अपनी भूमिका की बात कही और भाजपा नेताओं के साथ अपने संपर्कों का भी उल्लेख किया। चिराग पासवान समेत कुछ भाजपा नेताओं ने इस मामले में पुलिस से शिकायत की है, लेकिन भाजपा नेतृत्व और आरएसएस की ओर से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने दिल्ली पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिवदासन ने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने अपने वीडियो में पुलिस और राजनीतिक संपर्कों के प्रभाव का संकेत दिया था। यदि किसी व्यक्ति के राजनीतिक या पुलिस अधिकारियों से संपर्क हैं, तो भी कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर भी शिवदासन ने केंद्र सरकार और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों से जुड़े धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल हैं और इन मामलों की उचित जांच होनी चाहिए। भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने धार्मिक संस्थानों और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया है।
शिवदासन ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आर्थिक मामलों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास कर रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद पर शिवदासन ने कहा कि उनकी पार्टी के कांग्रेस और खड़गे से कई राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी नेता की जाति या पहचान को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जाति का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिवदासन ने कहा कि संविधान ने छुआछूत पर रोक लगाई है और किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता के लिए 'शुद्धिकरण' जैसी बात किया जाना बेहद पीड़ादायक है। ऐसी घटनाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
झारखंड में छात्र प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर पर शिवदासन ने कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के लिए पर्याप्त सकारात्मक कदम नहीं उठा रहे हैं। झारखंड सरकार छात्रों की मांगों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन सरकार को छात्र हित में आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने से बचना चाहिए। छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र में नवरात्रि उत्सव को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की कथित नियमावली पर भी शिवदासन ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी धर्मनिरपेक्ष और साझा सांस्कृतिक परंपरा से रही है। देश में लोग अलग-अलग धर्मों और समुदायों के त्योहारों में एक-दूसरे के साथ शामिल होते हैं। आरएसएस और वीएचपी जैसे संगठन धार्मिक उत्सवों में विभाजनकारी राजनीति का प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। त्योहारों की भावना सभी समुदायों को जोड़ने वाली होनी चाहिए और लोगों को धार्मिक पहचान के आधार पर अलग नहीं किया जाना चाहिए। सभी नागरिकों को देश की धर्मनिरपेक्ष परंपरा और संविधान के मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।
--आईएएनएस
पीएसके

