केमिस्ट्री नोबेल 2026 का ऐलान! जानिए फ्रांस के हेनरी कागन और जापान के केन्सो सोआई की उस खोज के बारे में, जिसने दुनिया बदल दी
2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के वैज्ञानिक केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की एक ऐसी पुरानी समस्या को समझने में अहम योगदान दिया, जिसका असर खास तौर पर दवाओं और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में देखने को मिला है।
इन वैज्ञानिकों के काम ने यह समझने का रास्ता आसान किया कि मिरर इमेज यानी एक-दूसरे की प्रतिबिंब जैसी संरचना वाले दो अणुओं में से किसी एक को चुनकर कैसे बनाया जा सकता है।यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी दवा में अणु का एक रूप बीमारी पर असरदार हो सकता है, जबकि उसका मिरर इमेज वाला दूसरा रूप कम असरदार या नुकसानदायक भी हो सकता है।नोबेल पुरस्कार विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
आखिर मिरर इमेज जैसे क्यों होते हैं अणु?
इसे समझने के लिए अपने दोनों हाथों का उदाहरण लीजिए। बायां और दायां हाथ देखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह नहीं घुमाया जा सकता कि एक हाथ बिल्कुल दूसरे की जगह फिट हो जाए।कुछ अणुओं की संरचना भी ऐसी ही होती है। उनके दो रूप होते हैं, जो एक-दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। रसायन विज्ञान में इस तरह की संरचना को समझना बेहद महत्वपूर्ण है।
समस्या तब पैदा होती है जब वैज्ञानिक ऐसे अणु तैयार करते हैं। कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं में दोनों रूप एक साथ बन सकते हैं।लेकिन दवा बनाने के मामले में दोनों रूप हमेशा समान नहीं होते। किसी अणु का एक रूप शरीर में वांछित प्रभाव पैदा कर सकता है, जबकि दूसरा रूप कम प्रभावी या कभी-कभी नुकसानदायक हो सकता है।इसलिए वैज्ञानिकों के सामने चुनौती थी कि जरूरत वाले अणु का सिर्फ सही रूप ज्यादा मात्रा में कैसे बनाया जाए।
हेनरी कागन ने दिखाई सही दिशा
हमारे शरीर में अमीनो एसिड से प्रोटीन बनते हैं। अमीनो एसिड के भी ऐसे रूप हो सकते हैं, जो एक-दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। इसके बावजूद शरीर प्रोटीन बनाने के लिए इनमें से एक खास रूप का इस्तेमाल करता है।यही सवाल वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय तक पहेली बना रहा कि आखिर जब दोनों रूप बनाए जा सकते हैं, तो शरीर एक ही रूप को क्यों चुनता है?
1986 में हेनरी बी. कागन ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण रास्ता दिखाया। उन्होंने ऐसी रासायनिक प्रक्रिया विकसित करने का तरीका बताया, जिसमें दोनों मिरर-इमेज अणु बराबर मात्रा में नहीं बनते।इस प्रक्रिया में एक खास रूप दूसरे की तुलना में ज्यादा मात्रा में तैयार किया जा सकता था। इसका मतलब था कि वैज्ञानिक अपनी जरूरत के अनुसार उस अणु के वांछित रूप को ज्यादा मात्रा में बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते थे।
केन्सो सोआई ने कागन के काम को आगे बढ़ाया
इसके बाद जापानी वैज्ञानिक केन्सो सोआई ने इस विचार को और आगे बढ़ाया।उन्होंने 5-पाइरिमिडिल एल्केनॉल नाम के एक रासायनिक पदार्थ पर प्रयोग किया और ऐसी प्रक्रिया विकसित की, जिसमें बनने वाला एक अणु आगे उसी तरह के दूसरे अणु बनने में मदद करता था।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं—अगर शुरुआत में किसी एक तरह के अणु थोड़े ज्यादा बन गए, तो वही अणु आगे और अपने जैसे अणुओं के बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने लगे।
इसके बाद नए बने अणु भी इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहे। इस तरह शुरुआत में मौजूद छोटा-सा अंतर धीरे-धीरे बहुत बड़ा हो गया।
2% का अंतर बढ़कर 87% कैसे हुआ?
सोआई के 1995 के प्रयोग में शुरुआत में एक तरह के अणु की मात्रा दूसरे की तुलना में सिर्फ 2 फीसदी ज्यादा थी।लेकिन रासायनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह अंतर बढ़ता गया और आखिरकार करीब 87 फीसदी तक पहुंच गया।यानी शुरुआत में मौजूद बहुत छोटा अंतर धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि एक खास तरह के अणु की मात्रा दूसरे की तुलना में बहुत ज्यादा हो गई।
बाद में 99.99% तक पहुंची सफलता
सोआई ने इसके बाद भी इस क्षेत्र में काम जारी रखा। 2003 में उन्होंने ऐसी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया, जिसमें एक खास प्रकार के अणु की मात्रा बढ़ते-बढ़ते 99.99 फीसदी तक पहुंच सकती थी।इसका मतलब यह था कि वैज्ञानिक लगभग पूरी तरह एक ही प्रकार के अणु को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते थे।यही उपलब्धि दवा निर्माण और रासायनिक उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई, क्योंकि किसी दवा में सही संरचना वाले अणु का इस्तेमाल उसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा दोनों के लिए अहम हो सकता है।
दवाएं बनाने में क्यों अहम है यह खोज?
किसी दवा को विकसित करते समय वैज्ञानिकों के लिए सिर्फ यह जरूरी नहीं होता कि नया अणु बनाया जाए। यह भी जरूरी होता है कि वह अणु सही संरचना और सही रूप में मौजूद हो।कागन और सोआई के काम ने वैज्ञानिकों को ऐसे रासायनिक तरीकों को समझने में मदद की, जिनसे मिरर-इमेज वाले अणुओं में से किसी एक वांछित रूप को ज्यादा मात्रा में बनाया जा सके।यही वजह है कि उनकी खोज को आधुनिक रसायन विज्ञान और दवा निर्माण के क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
आसान भाषा में समझें
दो अणु दिखने में एक जैसे, लेकिन काम में अलग हो सकते हैं। कागन ने सही अणु को चुनने की दिशा दिखाई और सोआई ने उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर एक ही तरह के अणुओं को लगभग पूरी तरह बनाने का रास्ता दिखाया।यही वैज्ञानिक उपलब्धि 2026 के केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार के पीछे की सबसे बड़ी वजहों में से एक है।

