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चरमरा रही परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक से 10 करोड़ छात्र प्रभावित: हन्नान मोल्लाह

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की याचिका खारिज किए जाने के बाद परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर सीपीआई(एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और इसका सबसे अधिक खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
चरमरा रही परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक से 10 करोड़ छात्र प्रभावित: हन्नान मोल्लाह

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम की याचिका खारिज किए जाने के बाद परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर सीपीआई(एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और इसका सबसे अधिक खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में पूर्व सांसद ने कहा कि परीक्षा प्रणाली के पीछे की साजिश अब उजागर हो चुकी है। जिस तरह से विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं का दुरुपयोग हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में लगभग 10 करोड़ छात्र किसी न किसी रूप में इस अव्यवस्था से प्रभावित हुए हैं। बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और युवाओं में गहरी निराशा का माहौल पैदा हुआ है।

उन्होंने कहा कि कई छात्र वर्षों तक तैयारी करने के बाद भी परीक्षा रद्द होने या परिणामों में देरी के कारण मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थिति के चलते कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी विफलता के बावजूद इसके लिए जिम्मेदार मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।

इस दौरान हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार के खिलाफ भूमि अधिकारों और किसानों के मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की मांग बेहद स्पष्ट है। देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और बड़ी संख्या में गरीब लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर झुग्गी-बस्तियों में रहने को मजबूर होते हैं।

उन्होंने कहा कि किसान केवल अपने परिवार का पेट भरने के लिए खेती नहीं करते, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। किसान आम जनता और उद्योगों दोनों के लिए आवश्यक खाद्यान्न और कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं। इसके बावजूद सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पूरी तरह किसान-विरोधी नीतियों पर काम कर रही है। किसान मेहनत करके फसल उगा रहे हैं, लेकिन उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है और किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आती।

पूर्व सांसद ने कहा कि कोई भी कारोबार लगातार नुकसान में नहीं चल सकता और खेती भी इससे अलग नहीं है। यदि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा तो कृषि क्षेत्र पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम सुनिश्चित करे, लेकिन सरकार ऐसा करने को तैयार नहीं दिख रही है।

केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए हन्नान मोल्लाह ने कहा कि किसानों और आम जनता से किए गए कई वादे पूरे नहीं किए गए हैं। हम पिछले दस वर्षों से सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य लोगों को संगठित कर उनकी आवाज को मजबूत करना है। सरकार को भी जनता की ताकत को समझना चाहिए और किसानों, मजदूरों तथा युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके

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