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चुनावी जुलूस में अफरा-तफरी: ढोल-नगाड़ों की आवाज से बिदके बैल, वायरल हुआ वीडियो

चुनावी जुलूस में अफरा-तफरी: ढोल-नगाड़ों की आवाज से बिदके बैल, वायरल हुआ वीडियो

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले की आउसग्राम सीट से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां टीएमसी प्रत्याशी श्यामा प्रसन्ना लोहार के चुनावी जुलूस के दौरान अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रत्याशी के समर्थन में एक भव्य जुलूस निकाला गया था, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल थे। पूरे माहौल में ढोल-नगाड़ों की आवाज और उत्साह का वातावरण था। इसी जुलूस में कुछ बैल भी शामिल थे, जो पारंपरिक रूप से शोभायात्रा का हिस्सा बने हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही ढोल-नगाड़ों की आवाज तेज हुई, बैल अचानक बिदक गए। तेज आवाज और भीड़भाड़ के बीच वे घबरा गए और इधर-उधर भागने लगे। इस अचानक हुई स्थिति से कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और लोग भी थोड़े समय के लिए असहज हो गए।

हालांकि, वहां मौजूद लोगों और आयोजकों ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की और किसी तरह बैलों को नियंत्रित कर माहौल को सामान्य किया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

इस पूरी घटना का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड कर लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे अचानक स्थिति बदलती है और जुलूस का उत्सवपूर्ण माहौल कुछ समय के लिए अव्यवस्थित हो जाता है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे एक “अप्रत्याशित घटना” बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि तेज आवाज और जानवरों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक होती है। वहीं कुछ यूजर्स ने इस पर हल्के-फुल्के अंदाज में कमेंट भी किए हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद जुलूस को थोड़ी देर के लिए रोककर स्थिति को सामान्य किया गया और बाद में कार्यक्रम फिर से सुचारू रूप से आगे बढ़ा।

फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार शेयर किया जा रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे एक अनोखी और अप्रत्याशित घटना के रूप में देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं, इसलिए सावधानी और व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।

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