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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बयान के लिए माफी मांगें : मनजिंदर सिंह सिरसा

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री पर दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि खड़गे और कांग्रेस पार्टी यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है कि एक चाय वाला कैसे देश का प्रधानसेवक बना।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बयान के लिए माफी मांगें : मनजिंदर सिंह सिरसा

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रधानमंत्री पर दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि खड़गे और कांग्रेस पार्टी यह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है कि एक चाय वाला कैसे देश का प्रधानसेवक बना।

एक वीडियो जारी करते हुए दिल्ली सरकार में मंत्री सिरसा ने कहा कि खड़गे द्वारा पीएम के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना अनुचित है। यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के किसी नेता ने देश के प्रधानसेवक के प्रति घृणा भरी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया हो। यह कांग्रेस की पुरानी आदत रही है। कांग्रेस को सत्ता नहीं मिल रही है तो वे लगातार पीएम के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर अपनी मानसिकता को प्रदर्शित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खड़गे के बयान से लगता है कि उनका संविधान के प्रति विश्वास नहीं है। लोकतंत्र में विरोध हो सकता है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के प्रति ऐसी नफरत फैलाना बेहद शर्मनाक है। खड़गे को अपने इस बयान के लिए तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि जिहादियों के लिए कवर फायरिंग करने वाली कांग्रेस को हर देशभक्त गलत ही नजर आएगा। खड़गे का बयान कांग्रेस की विक्षिप्त हालत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना बताता है कि कांग्रेस के पास ना मर्यादा बची, ना मुद्दे।

दिल्ली भाजपा चीफ वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक असहमति नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के जनादेश और लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा हमला है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान बेहद शर्मनाक, निम्नस्तरीय और घोर आपत्तिजनक है। यह न केवल उनकी मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि विपक्ष की गिरती हुई राजनीतिक संस्कृति का भी प्रमाण है। ऐसी भाषा देश की गरिमा को ठेस पहुंचाती है और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान करती है। देश की जनता इस तरह की सोच को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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