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सीजीटीएन सर्वे : जब मशीनें सोचना शुरू कर देंगी, तो इंसान को किन सवालों के जवाब देने होंगे?

सीजीटीएन सर्वे : जब मशीनें सोचना शुरू कर देंगी, तो इंसान को किन सवालों के जवाब देने होंगे?
सीजीटीएन सर्वे : जब मशीनें सोचना शुरू कर देंगी, तो इंसान को किन सवालों के जवाब देने होंगे?

बीजिंग, 21 जुलाई (आईएएनएस)। इतिहास में, हर तकनीकी क्रांति ने मानवीय क्षमताओं के प्रदर्शन और मानवता की परिभाषा में एक नया आयाम जोड़ा है। लेकिन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता इससे कहीं अधिक गहरा बदलाव लाती है। यह अब केवल वास्तविकता को दर्ज नहीं करती, बल्कि उसका पूर्वानुमान भी लगाने लगी है।

यह अब केवल दुनिया की मौजूदा स्थिति को ही नहीं दर्शाती, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को सामने आने से पहले ही व्यवस्थित करने लगी है। इस अर्थ में, भविष्यवाणी अब केवल भविष्य के संभावित परिणामों का वर्णन नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसी शक्ति बन गई है जो आने वाले समय को सक्रिय रूप से आकार देती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ा सबसे गहरा सवाल यह नहीं है कि मशीनें इंसानों की तरह सोच सकती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि उनके निर्णयों को किस प्रकार का अधिकार प्राप्त होने लगा है। यह अधिकार कौन प्रदान करता है? कौन इसकी जवाबदेही तय करता है? और अंततः, यह मानवता के लिए किस प्रकार का भविष्य निर्मित करेगा?

सीजीटीएन के एक वैश्विक ऑनलाइन सर्वेक्षण के मुताबिक 85.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तीव्र विकास वैश्विक सुरक्षा और शासन के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रहा है।

92.6 प्रतिशत ने चिंता व्यक्त की कि डीपफेक और एआई द्वारा उत्पन्न गलत सूचनाएं सामाजिक विश्वास की नींव को ही कमजोर कर सकती हैं, जबकि 87.8 प्रतिशत ने आशंका जताई कि तकनीकी बाधाएं और "डिजिटल दीवारें" वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को खंडित कर सकती हैं। ये निष्कर्ष बताते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उत्पन्न चुनौतियां लंबे समय से प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में वैश्विक शासन को मजबूत करना और व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना साझा अनिवार्यता बन गई है।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 82.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ को एआई प्रशासन के नियमों को निर्धारित करने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए ताकि यह प्रणाली निष्पक्ष और समावेशी हो।

वहीं, 87.5 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सुलभ और समावेशी एआई को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेगा, जिससे प्रौद्योगिकी असमानता का नया कारण न बने। ये निष्कर्ष न केवल एआई प्रशासन के लिए वैश्विक जनता की साझा अपेक्षाओं को दर्शाते हैं, बल्कि एक बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय मत को भी उजागर करते हैं कि तकनीकी एकाधिकार नहीं, बल्कि खुलापन और सहयोग तथा नियामक बाधाओं के बजाय समावेशिता और साझा लाभ एआई प्रशासन के भविष्य को परिभाषित करने चाहिए।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

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