CBSE का बड़ा खुलासा: नीरजा-मोदी स्कूल में एंटी-बुलिंग कमेटी सिर्फ कागजों तक सीमित, CCTV मॉनिटरिंग में भी लापरवाही
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नीरजा-मोदी स्कूल को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं। बोर्ड की जांच में सामने आया है कि स्कूल में एंटी-बुलिंग कमेटी केवल कागजों में मौजूद है, जबकि जमीनी स्तर पर इसका कोई प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा। इतना ही नहीं, स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग भी नहीं हो रही है, जो छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चूक मानी जा रही है।
CBSE द्वारा की गई निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि स्कूल प्रशासन ने नियमों के अनुसार एंटी-बुलिंग कमेटी का गठन तो किया है, लेकिन इसकी बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं और न ही बुलिंग से जुड़े मामलों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर स्कूल में छात्रों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देने के लिए एंटी-बुलिंग कमेटी का सक्रिय होना अनिवार्य है, लेकिन नीरजा-मोदी स्कूल इस मानक पर खरा नहीं उतर पाया।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्कूल में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का उपयोग केवल औपचारिकता तक सीमित है। कैमरे लगे होने के बावजूद उनकी लाइव मॉनिटरिंग नहीं की जा रही और न ही रिकॉर्डेड फुटेज की नियमित जांच होती है। इससे स्कूल परिसर में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर छात्रों की सुरक्षा पर पड़ता है।
CBSE अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में बढ़ते बुलिंग के मामलों को देखते हुए निगरानी व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सीसीटीवी सिस्टम और एंटी-बुलिंग कमेटी प्रभावी ढंग से काम करें, तो कई घटनाओं को समय रहते रोका जा सकता है। बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रशासन को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल की उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही चिंता बढ़ाने वाली है। कई अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
CBSE ने साफ किया है कि यदि तय समय सीमा में स्कूल द्वारा आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है। बोर्ड का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कुल मिलाकर, नीरजा-मोदी स्कूल को लेकर CBSE की यह रिपोर्ट शिक्षा व्यवस्था में निगरानी और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर करती है। अब देखना होगा कि स्कूल प्रशासन इन खामियों को कितनी गंभीरता से लेकर सुधार करता है।

