सीबीआई ने डीजीसीए के पूर्व सीनियर अधिकारी अनिल गिल समेत कई लोगों के खिलाफ दर्ज किया केस
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) में फ्लाइंग ट्रेनिंग के तत्कालीन डायरेक्टर (डीएफटी) कैप्टन अनिल गिल और कई कंपनियों व अन्य लोगों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के मामले में केस दर्ज किया है।
एफआईआर के अनुसार, सीबीआई ने 21 अगस्त को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' (2018 में संशोधित) की धारा 11 और 12 तथा आईपीसी की धारा 120B के तहत रेगुलर केस दर्ज किया। एफआईआर में बताया गया है कि 7 अप्रैल 2025 को गिल के खिलाफ एक शिकायत के बाद शुरुआती जांच दर्ज की गई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि डीजीसीए में फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया।
एफआईआर में कहा गया है कि गिल ने कथित तौर पर कुछ चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओएस) को गलत तरीके से आधिकारिक फायदा पहुंचाया, जिससे इसी तरह के काम करने वाले अन्य ऑपरेटरों को नुकसान और आर्थिक हानि हुई।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि गिल ने अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा चलाई जा रही कथित बेनामी व शेल कंपनियों के जरिए बहुत कम कीमत पर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट खरीदने में मदद की और बाद में उन्हें पसंदीदा एफटीओएस को ऊंची दरों पर लीज पर दिया, जिससे कथित तौर पर गैर-कानूनी आर्थिक फायदा हुआ।
एफआईआर के मुताबिक, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (बीएजीपीएल) को 2016 में बनाया गया था और इसके डायरेक्टरों में गिल की मां और मौसी शामिल थीं, जबकि बाद में उनके कजिन और भाभी भी जुड़ गए। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड जैसी दूसरी कंपनियों ने भी बनाई, जिनमें गिल के रिश्तेदार डायरेक्टर थे।
एफआईआर में बताया गया है कि बीएजीपीएल ने क्रमशः 10 लाख रुपये और 37.5 लाख रुपये में दो सेसना एयरक्राफ्ट खरीदे और बाद में दोनों एयरक्राफ्ट रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दिए। इसके लिए मंजूरी कथित तौर पर गिल ने अपनी आधिकारिक रेगुलेटरी हैसियत से दी थी।
एफआईआर के अनुसार, 2021 और अक्टूबर 2023 के बीच बीएजीपीएल ने कथित तौर पर अकेले रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से लीज रेंटल के तौर पर 2.16 करोड़ रुपये से ज़्यादा कमाए। एफआईआर में मंजूरी की प्रक्रिया में रेगुलेटरी पक्षपात का भी आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को शुरुआती एफटीओ मंजूरी एक महीने और तीन दिन में मिल गई, जबकि दूसरी कंपनियों को मंज़ूरी मिलने में कथित तौर पर चार से छह महीने लगे।
आरोप है कि गिल ने सितंबर 2022 में एक सिलेक्शन कमेटी की अध्यक्षता की थी, जिसने उनके कजिन विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के तौर पर नियुक्त किया था। बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी ने उन्हें लगभग 6.5 लाख रुपये की मासिक सैलरी पर नौकरी पर रख लिया।
एफआईआर में कहा गया है कि सेबर्स कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी से जुड़े संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन भी पाए गए। साथ ही, गिल पर आरोप है कि उन्होंने एविएशन से जुड़ी गतिविधियों में अपने करीबी रिश्तेदारों की भागीदारी और नौकरी के बारे में जानकारी नहीं दी।
सीबीआई की एफआईआर में कैप्टन अनिल गिल, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड, सेबर्स कॉर्पोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
--आईएएनएस
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