सीबीआई कोर्ट ने रिश्वत के मामले में एसबीआई के पूर्व ब्रांच मैनेजर को चार साल की सजा सुनाई
लखनऊ, 25 अगस्त (आईएएनएस)। सीबीआई की लखनऊ कोर्ट ने रिश्वत के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 90,000 रुपए के जुर्माने के साथ पूर्व ब्रांच मैनेजर को 4 साल की सजा सुनाई गई है।
अदालत ने 24 अगस्त को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शाहूपुरी शाखा, जिला चंदौली, यूपी के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अजय कुमार गौर को दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा और 90,000 रुपए का जुर्माना सुनाया है। यह जानकारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के सूचना अनुभाग ने मंगलवार को दी।
सीबीआई ने इस मामले में 26 फरवरी 2018 को आरोपी अजय कुमार गौर के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामला एक शिकायत पर आधारित था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एसबीआई के ब्रांच मैनेजर ने शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपए का पर्सनल लोन मंजूर करने और जारी करने के लिए 50,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत लोन की रकम का 5 प्रतिशत थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने आरोपी अजय कुमार गौर को शिकायतकर्ता से 40,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 27 अप्रैल 2018 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 9 जनवरी 2019 को आरोपी अजय कुमार गौर के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। बैंक में लोन जैसी आम प्रक्रिया के लिए भी अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
इससे पहले, 21 अगस्त को सीबीआई ने भगोड़े अपराधी रूप सिंह को गिरफ्तार किया था। उस पर ग्राहकों तक सामान ले जा रहे ट्रकों से 9 लाख रुपए का सामान गलत तरीके से हड़पने के मामले में लगभग 23 साल से फरार रहने का आरोप था।
सीबीआई के बयान के अनुसार, जांच एजेंसी की लगातार कोशिशों के बाद रूप सिंह को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले, सह-आरोपी अर्जुन सिंह को लगभग 22 साल तक फरार रहने के बाद 7 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 4 अक्टूबर 1998 को महाराष्ट्र के अमलनेर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 178/1998 से जुड़ा था और दो ट्रकों में लदे घी और मूंग जैसे सामान की कथित चोरी और हेराफेरी से संबंधित था।
--आईएएनएस
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