सीबीआई कोर्ट ने पीएनबी के पूर्व अधिकारियों को ठहराया दोषी, 3-3 साल की सुनाई सजा
नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली की सीबीआई विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की जोर बाग ब्रांच से जुड़े 4 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो पूर्व बैंक अधिकारियों और एक पैनल एडवोकेट को दोषी ठहराया। अदालत ने सजा का फैसला सुनाया।
दोषी ठहराए गए बैंक अधिकारी कुलविंदर कौर जौहर (तत्कालीन चीफ मैनेजर और ब्रांच हेड) और रंजीव सुनेजा (तत्कालीन सीनियर मैनेजर) हैं। अदालत ने दोनों को तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 75,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। बैंक के पैनल एडवोकेट नरेंद्र सिंह परिहार को ढाई साल की कैद की सजा सुनाई गई और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
सीबीआई ने यह मामला 11 जुलाई 2013 को दर्ज किया था। आरोप था कि आरोपी संजीव दीक्षित (मैसर्स शंकर मेटल्स के मालिक), संजय शर्मा (मैसर्स सुपर मशीन्स के मालिक), इंदिरा रानी और अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश रचकर जाली और नकली संपत्ति दस्तावेजों और केवाईसी के आधार पर पीएनबी जोर बाग ब्रांच से 4 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट सुविधा हासिल की। लोन की राशि को मंजूर के उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों में इस्तेमाल किया गया और बैंक फंड को फर्जी बैंक खातों के जरिए डायवर्ट कर दिया गया।
जांच में पता चला कि संजीव दीक्षित ने बैंक अधिकारी कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा और पैनल एडवोकेट एनएस परिहार के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों से क्रेडिट लिमिट मंजूर कराई और फर्जी फर्मों के खातों से पैसे निकाल लिए। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने संजीव दीक्षित (उर्फ संजय शर्मा), एन.एस. परिहार, कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा, राहुल शर्मा और राजीव शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
ट्रायल के दौरान अदालत ने कुलविंदर कौर जौहर, रंजीव सुनेजा और नरेंद्र सिंह परिहार को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। राहुल शर्मा और राजीव शर्मा को बरी कर दिया गया है। संजीव दीक्षित इस मामले में भगोड़ा अपराधी है और ट्रायल से बच रहा है।
यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग को उजागर करता है। सीबीआई ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
--आईएएनएस
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