सीबीआई कोर्ट का फैसला, यूको बैंक के अधिकारियों समेत चार दोषियों को 5 साल की सजा
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। सीबीआई की विशेष अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के दो मामलों में बड़ा फैसला सुनाते हुए यूको बैंक के अधिकारियों समेत चार आरोपियों को दोषी ठहराया है। अहमदाबाद स्थित सीबीआई कोर्ट ने 23 मार्च को सुनाए गए अपने निर्णय में सभी दोषियों को पांच साल की सजा और अलग-अलग मामलों में भारी जुर्माना भी लगाया।
पहले मामले में अदालत ने मेदम भगवती प्रसाद, जो उस समय चिलोडा ब्रांच, गांधीनगर में सीनियर मैनेजर थे, और भास्कर रमेशचंद्र सोनी, जो असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे, को दोषी पाया। इनके साथ जयेंद्रसिंह दह्याजी मकवाना, जो मेसर्स हेवन फाइव एंटरप्राइज, साबरकांठा के मालिक हैं, को भी सजा सुनाई गई। कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को पांच साल की सजा के साथ कुल 1.33 करोड़ रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया।
जांच एजेंसी सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न व्यक्तियों और फर्मों को बड़े पैमाने पर लोन मंजूर किए। वर्ष 2015 तक इन लोन खातों में लगभग 3.63 करोड़ रुपए बकाया हो गए थे और अधिकांश खाते एनपीए में बदल गए थे। इस घोटाले से बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। सीबीआई ने इस मामले में 27 अप्रैल 2016 को केस दर्ज किया था और जांच पूरी करने के बाद 17 नवंबर 2017 को चार्जशीट दाखिल की थी।
दूसरे मामले में भी अदालत ने मेदम भगवती प्रसाद और भास्कर रमेशचंद्र सोनी को दोषी ठहराया। इनके साथ निजी व्यक्ति वनराजजी प्रभातजी सोलंकी, जो मेसर्स वनराज एंटरप्राइज, गांधीनगर के प्रोपराइटर हैं, को भी सजा सुनाई गई। इस मामले में अदालत ने सभी दोषियों को पांच साल के कठोर कारावास के साथ कुल 72 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
इस केस में भी आरोप था कि बैंक अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 6.43 करोड़ रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट और टर्म लोन मंजूर किए थे। बाद में इन लोन खातों में भारी डिफॉल्ट हुआ और कई खाते एनपीए में बदल गए, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।
अदालत ने ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी माना और सख्त सजा सुनाई। यह फैसला बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
--आईएएनएस
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